आयुर्वेदिक
ग्रंथों में बेल को पाचन सुधारने, शरीर
को ऊर्जा देने और आंतों को मजबूत बनाने वाला बताया गया है। इसकी खास बात यह है कि
केवल फल ही नहीं, बल्कि
इसकी पत्तियां, जड़
और छाल भी गुणों से भरपूर होती हैं। सही उपयोग के लिए विशेषज्ञ या आयुर्वेद
चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर रहता है।
सूजन और पाचन
में लाभकारी
बेल
में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और जीवाणुरोधी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन कम करने में सहायक हो
सकते हैं। यदि कब्ज, गैस,
पेट में जलन या अल्सर जैसी समस्याएं हों,
तो बेल का सेवन राहत पहुंचा सकता है। यह
आंतों की सफाई में मदद करता है और पाचन तंत्र को संतुलित रखता है। जिन लोगों को
इसका शरबत पसंद नहीं, वे
बेल का पाउडर भी ले सकते हैं, जो
दस्त और कब्ज दोनों स्थितियों में उपयोगी माना जाता है।
रक्त शर्करा पर
प्रभाव
बेल
की पत्तियों से तैयार अर्क ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में सहायक बताया
जाता है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित
रहने में मदद मिल सकती है। हालांकि मधुमेह के मरीजों को इसे नियमित रूप से लेने से
पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए।
सेवन का सही
तरीका
बेल
का शरबत बनाने के लिए इसके गूदे को पानी में अच्छी तरह मसलकर छान लें और
स्वादानुसार मिश्री मिलाएं। इसे सुबह या शाम पिया जा सकता है।
किन्हें बरतनी
चाहिए सावधानी
डायबिटीज
से पीड़ित व्यक्ति और गर्भवती महिलाएं इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह
जरूर लें।
प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला बेल न
केवल गर्मी से राहत दिलाता है, बल्कि
संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।