1,600 घुसपैठियों के लिए 1.56 करोड़ भारतीय वोटर लिस्ट से बाहर

Posted on: 2026-11-04


देश में मतदाता सूची की शुद्धता और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। करीब 1,600 संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की खबर के बीच लगभग 1.56 करोड़ भारतीय मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर होने का मुद्दा चर्चा में है। इस मामले ने चुनावी प्रक्रिया, नागरिकता और मतदाता अधिकारों से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मतदाता सूची में नाम शामिल होना किसी भी भारतीय नागरिक के लिए मतदान का अधिकार इस्तेमाल करने की पहली शर्त है। ऐसे में बड़ी संख्या में नाम हटने की खबर से आम मतदाताओं के बीच भी चिंता पैदा हो सकती है। हालांकि, इस पूरे मामले में यह समझना जरूरी है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और किसी व्यक्ति को घुसपैठिया घोषित करने की प्रक्रिया अलग-अलग कानूनी आधारों पर होती है।रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में सबसे ज्यादा 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। इनमें बेंगलुरु उत्तर क्षेत्र के 545 नेपाली नागरिक शामिल हैं। झारखंड में तीन अफगान नागरिकों के नाम मतदाता सूची में पाए गए, जबकि मेघालय में नेपाली मूल के दो लोगों की पहचान हुई। केरल में करीब 500 विदेशी नागरिकों और गोवा में 419 संदिग्ध विदेशी पासपोर्ट धारकों की पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, मिजोरम में ऐसी कोई पहचान दर्ज नहीं की गई। इन आंकड़ों के आधार पर छह राज्यों में कुल मिलाकर लगभग 1,640 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई है

देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने और उसमें शामिल अपात्र नामों को हटाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया था। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, मतदाता सूची से लाखों-करोड़ों नाम हटाए जाने के आंकड़ों ने इस अभियान की प्रभावशीलता और उसके उद्देश्य पर सवाल खड़े किए हैं। 29 अक्टूबर 2026 को सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, छह राज्यों में लगभग 9.86 करोड़ मतदाताओं वाली आबादी के बीच करीब 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद SIR को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है