MEA सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने कॉमनवेल्थ को ठोस, लोगों पर केंद्रित नतीजों पर ध्यान देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

Posted on: 2026-11-03


विदेश मंत्रालय में सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि कॉमनवेल्थ को ठोस, लोगों पर केंद्रित नतीजों पर ध्यान देने की ज़रूरत है, जिसमें डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी को डेमोक्रेटाइज़ करना भी शामिल है। सेक्रेटरी कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ़ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM) से पहले सेंट जॉन्स, एंटीगुआ और बारबुडा में प्री-CHOGM कॉमनवेल्थ फॉरेन मिनिस्टर्स मीटिंग को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कॉमनवेल्थ के साझा हितों और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए क्लाइमेट एक्शन और डिज़ास्टर रेजिलिएंस को मज़बूत करने, रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज़्म को बढ़ावा देने, और दूसरी बातों पर भी ध्यान दिया।यह बैठक कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM) से पहले आयोजित की गई, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने संगठन की भविष्य की प्राथमिकताओं और साझा चुनौतियों पर चर्चा की। अपने संबोधन में सिबी जॉर्ज ने कहा कि कॉमनवेल्थ को केवल चर्चाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे कार्यक्रमों और पहलों को आगे बढ़ाना चाहिए, जिनसे आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सुविधाओं, कौशल विकास और आर्थिक अवसरों के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि तकनीकी विकास का लाभ केवल विकसित देशों या बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे और विकासशील देशों को भी इसका समान अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए डिजिटल संसाधनों, आधुनिक तकनीक और नवाचार को अधिक सुलभ बनाने की जरूरत है। बैठक के दौरान सिबी जॉर्ज ने जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और इसका प्रभाव विशेष रूप से छोटे द्वीपीय विकासशील देशों तथा कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऐसे में कॉमनवेल्थ देशों को जलवायु कार्रवाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने आपदाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करने, समय रहते चेतावनी प्रणाली विकसित करने और प्रभावित समुदायों को राहत एवं पुनर्वास उपलब्ध कराने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बात रखी। उनका मानना है कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल कुछ देशों के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सभी देशों की समान भागीदारी, पारदर्शिता और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। सिबी जॉर्ज ने कॉमनवेल्थ के साझा हितों और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, साझेदारी और समन्वय मजबूत करने की बात कही। उल्लेखनीय है कि कॉमनवेल्थ 56 स्वतंत्र देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो लोकतंत्र, विकास, शांति, मानवाधिकार और आपसी सहयोग जैसे साझा मूल्यों को बढ़ावा देता है। भारत भी इस संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य है और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। प्री-CHOGM बैठक में भारत की ओर से उठाए गए मुद्दे इस बात को रेखांकित करते हैं कि देश वैश्विक विकास में तकनीक की समान उपलब्धता, जलवायु न्याय, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार को महत्वपूर्ण मानता है। आने वाली कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग में इन विषयों पर सदस्य देशों के बीच आगे चर्चा और सहयोग की संभावनाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।