भारत में दिवाली का त्योहार आते ही पटाखों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। देश के बाजार रंग-बिरंगी आतिशबाजी, फुलझड़ियों, अनार, चकरी और रॉकेट से सज जाते हैं। इस कारोबार में तमिलनाडु का शिवकाशी शहर सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है। इसे भारत की पटाखा नगरी भी कहा जाता है। यहां हजारों छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां पटाखों और आतिशबाजी से जुड़े उत्पादों का निर्माण करती हैं। दिवाली के सीजन में इस उद्योग का कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। अनुमानित तौर पर त्योहार के दौरान करीब 4 हजार करोड़ रुपये की बिक्री का आंकड़ा इस उद्योग की आर्थिक ताकत को दिखाता है।
लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि जब भारत में पटाखों का इतना बड़ा उत्पादन होता है, तो अंतरराष्ट्रीय आतिशबाजी बाजार में चीन का दबदबा क्यों बना हुआ है? आखिर ऐसा क्या कारण है कि भारत का शिवकाशी घरेलू बाजार में मजबूत होने के बावजूद वैश्विक निर्यात में चीन को टक्कर नहीं दे पा रहा है?
तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में स्थित शिवकाशी भारत का सबसे बड़ा पटाखा उत्पादन केंद्र है। देश के संगठित पटाखा कारोबार का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यहां पटाखा बनाने वाली फैक्ट्रियों के साथ-साथ कागज, पैकेजिंग, प्रिंटिंग और केमिकल से जुड़े कारोबार भी बड़े पैमाने पर संचालित होते हैं। इस उद्योग से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। यहां का सूखा मौसम भी पटाखा उत्पादन के लिए अनुकूल माना जाता हैशिवकाशी के पटाखा उद्योग की सबसे बड़ी कमाई दिवाली के आसपास होती है। उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, शिवकाशी की कुल बिक्री का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा दिवाली के बाजार से आता है। यह रकम 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। इसके अलावा केरल के विषु त्योहार और महाराष्ट्र के गणेश चतुर्थी जैसे आयोजनों में भी यहां बने पटाखों की अच्छी मांग रहती है। यानी कुछ ही त्योहारों के दौरान इस उद्योग का बड़ा कारोबार हो जाता है
दुनिया के पटाखा निर्यात बाजार में चीन की मजबूत पकड़ है। चीन का हुनान प्रांत स्थित लियूयांग दुनिया की प्रमुख आतिशबाजी उत्पादन नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां बड़े स्तर पर उत्पादन होता है और कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ वर्षों पुराना नेटवर्क है।
चीन की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल उत्पादन तंत्र, आधुनिक तकनीक, बड़े पैमाने पर सप्लाई और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क है। वहां की कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार बड़े ऑर्डर तैयार करने और समय पर उनकी डिलीवरी करने में सक्षम हैं। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में चीनी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी बनी हुई है