पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर दिखाई देने लगा है। ईरान पर हमले की खबर सामने आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। इस घटनाक्रम ने दुनियाभर के तेल बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाएंगे?
दरअसल, ईरान पश्चिम एशिया का एक महत्वपूर्ण तेल उत्पादक देश है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस पूरे घटनाक्रम में बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। इसी वजह से हमले और युद्ध की खबरों पर तेल की कीमतों में तुरंत उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
हालांकि, 3 नवंबर की सुबह तेल बाजार में तेजी बहुत सीमित रही। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमले की खबर के बाद ब्रेंट क्रूड 0.03 प्रतिशत बढ़कर 104.80 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 0.21 प्रतिशत बढ़कर 96.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। यानी बाजार में फिलहाल युद्ध के बढ़ते खतरे और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदों, दोनों का असर दिखाई दे रहा है
अब सवाल है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी या नहीं? दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है। इसका असर तेल कंपनियों की लागत, रुपये की स्थिति और देश की महंगाई पर भी पड़ता है। अगर लंबे समय तक कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है