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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 22 से 27 अक्टूबर तक जर्मनी एवं नीदरलैंड के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान दोनों देशों के साथ व्यापार, निवेश और औद्योगिक एवं तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। उनके साथ करीब 100 भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप का प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार गोयल 22 से 24 अक्टूबर तक जर्मनी और 24 से 27 अक्टूबर तक नीदरलैंड में रहेंगे। जर्मनी में वह बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में हिस्सा लेंगे और वहां अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं तथा प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे।
इस दौरान जर्मनी के आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री और जर्मन चांसलर के आर्थिक एवं वित्तीय नीति सलाहकार तथा जी-7 और जी-20 शेरपा के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं।
इन बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने, उन्नत इंजीनियरिंग, हरित परिवहन और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग तथा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की जारी वार्ता से पैदा होने वाले अवसरों पर चर्चा होगी।
नीदरलैंड में गोयल हेग में आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्री और विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा वह उत्तर हॉलैंड के किंग्स कमिश्नर और डच संसद की विदेश व्यापार तथा यूरोपीय मामलों से जुड़ी समितियों के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे।
भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जर्मनी में विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारियों और कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठकें करेगा। इनमें वाहन उद्योग, उन्नत विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, उपभोक्ता वस्तुएं, कपड़ा, स्वास्थ्य और दवा उद्योग शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल जर्मनी में निवेश और कारोबार स्थापित करने के अवसरों पर जर्मनी ट्रेड एंड इन्वेस्ट के साथ भी चर्चा करेगा।
प्रतिनिधिमंडल 25 अक्टूबर को रॉटरडैम बंदरगाह का दौरा कर वहां की माल ढुलाई और आपूर्ति शृंखला व्यवस्था का जायजा लेगा। इसके बाद 26 अक्टूबर को हेग में भारत-नीदरलैंड व्यापार मंच आयोजित होगा, जिसे गोयल और नीदरलैंड के विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री संबोधित करेंगे। मंच के साथ छह क्षेत्रों में कारोबारी बैठकें और कंपनियों के बीच संपर्क कार्यक्रम होंगे। इनमें कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, उच्च प्रौद्योगिकी, नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, दवा, कपड़ा, इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र शामिल हैं।