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आइची-नागोया, 30 सितंबर । भारतीय तीरंदाजों ने एशियन खेल 2026 में कंपाउंड स्पर्धा में अपना दबदबा कायम रखते हुए बुधवार को पुरुष टीम वर्ग का स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर लिया। कुशल दलाल, साहिल जाधव और गणेश थिरुमुरु की भारतीय तिकड़ी ने रोमांचक फाइनल में चीन को 238-237 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह एशियन खेलों में भारत का दसवां स्वर्ण पदक है।
इस जीत के साथ भारत ने एशियन खेल में कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। इससे पहले भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर स्वर्ण जीता था, जबकि चिकिता तनीपर्थी और साहिल जाधव की जोड़ी ने कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया को शूटआउट में हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया था।
पुरुष कंपाउंड टीम फाइनल में भारत की शुरुआत थोड़ी धीमी रही। चीन ने पहले चरण में छह के छह निशानों पर 10 अंक हासिल करते हुए 60 अंक बनाए, जबकि भारत 58 अंक ही जुटा सका। दूसरे चरण के बाद भी चीन ने अपनी बढ़त बरकरार रखी और स्कोर 120-118 रहा।
तीसरे चरण में भारतीय तिकड़ी ने शानदार वापसी की। साहिल, गणेश और कुशल ने शुरुआत में लगातार 10 अंक हासिल किए। चीन के एक तीर पर 9 अंक आने के बाद भारत ने अंतर घटाकर एक अंक कर दिया। तीसरे चरण के अंत में चीन 179-178 से आगे था।
निर्णायक चौथे चरण में भारतीय तीरंदाजों ने दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। साहिल, गणेश और कुशल ने लगातार 10-10 अंक हासिल किए। वहीं, चीन के जियाहाओ लियाओ के 8 अंक वाले निशाने ने भारत को बढ़त दिला दी। इसके बाद भारतीय तिकड़ी ने अपने अंतिम तीन तीरों पर भी 10-10 अंक हासिल कर 238 अंक पूरे किए और चीन को 237 पर रोककर स्वर्ण पदक पक्का कर लिया।
साहिल ने पूरे फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और निर्णायक चरण में भी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। 20 वर्षीय गणेश और कुशल ने भी दबाव के बीच सटीक निशाने लगाकर भारत की जीत सुनिश्चित की।
यह भारत के लिए बुधवार का चौथा स्वर्ण पदक है, जबकि तीरंदाजी में यह तीसरा स्वर्ण है। भारतीय महिला कंपाउंड टीम, मिश्रित टीम और अब पुरुष कंपाउंड टीम की स्वर्णिम सफलता ने एशियन खेल में भारत की कंपाउंड तीरंदाजी की ताकत को स्पष्ट किया है।
इससे पहले दिन में भारत ने निशानेबाजी में ट्रैप मिश्रित टीम में भी स्वर्ण पदक जीता था। नीरू धांडा और किनान चेनाई की जोड़ी ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ खिताब अपने नाम किया था। इस तरह बुधवार को भारत के स्वर्ण पदकों में तीरंदाजी और निशानेबाजी की अहम भूमिका रही।