शहर के सरकंडा क्षेत्र में रहने वाले 68 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करीब 35 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की। आरोपी खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में फंसाने की धमकी दे रहे थे। पीड़ित ने ठगों की बातों में आकर अपने विभिन्न बैंक खातों में जमा पूरी रकम एक खाते में इकट्ठा कर ली थी। समय रहते पुलिस को मामले की जानकारी मिलने से रकम ठगों के खाते में जाने से बच गई।
एएसपी मधुलिका सिंह के अनुसार, सोमवार को पीड़ित के एक परिचित ने एसएसपी रजनेश सिंह को फोन कर घटना की सूचना दी। परिचित ने बताया कि सेवानिवृत्त अधिकारी को कुछ संदिग्ध लोगों द्वारा लगातार फोन किया जा रहा है। आरोपी वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे पूछताछ कर रहे हैं और किसी से संपर्क नहीं करने का दबाव बना रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल सरकंडा थाना प्रभारी को पीड़ित के घर भेजा। पुलिस के मुताबिक साइबर ठगों ने खुद को सुनील कुमार गौतम नामक आईपीएस अधिकारी बताया था। आरोपियों ने पीड़ित से कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में सामने आया है। उन्हें गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। लगातार वीडियो कॉल कर ठगों ने पीड़ित को अपनी निगरानी में होने का अहसास कराया और घर से बाहर निकलने तथा किसी अन्य व्यक्ति से बात करने से मना कर दिया।
गिरफ्तारी के डर और मानसिक दबाव में आए सेवानिवृत्त अधिकारी ने ठगों के निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया। आरोपियों ने उन्हें अपने सभी बैंक खातों में जमा रकम एक खाते में लाने के लिए कहा। पीड़ित ने अलग-अलग खातों से लगभग 35 लाख रुपये एक ही बैंक खाते में जमा कर लिए। इसके बाद साइबर ठग पूरी रकम अपने बताए खाते में ट्रांसफर कराने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पीड़ित के परिचित को कुछ संदेह हुआ और उसने तत्काल पुलिस को जानकारी दी। सरकंडा पुलिस की टीम पीड़ित के घर पहुंची और उन्हें समझाया कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। पुलिस ने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाते में जमा रकम को सुरक्षित कराया। इस त्वरित कार्रवाई के कारण पीड़ित की वर्षों की जमा पूंजी ठगों के हाथ जाने से बच गई।
प्रारंभिक जांच में ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मिले हैं। पुलिस ने संबंधित नंबरों और बैंक खातों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। मामले की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और उनकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम विभाग या बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स पार्सल या किसी बड़े अपराध में नाम आने की बात कहकर गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को वीडियो कॉल पर रहने और बैंक खातों की रकम दूसरे खाते में भेजने के लिए मजबूर किया जाता है।