नीति आयोग का बड़ा अनुमान, 2035 तक भारत बन सकता है 50 अरब डॉलर का टेलीकॉम उपकरण निर्यात केंद्र

Posted on: 2026-08-17


भारत के दूरसंचार और नेटवर्क उपकरण क्षेत्र में तेज वृद्धि की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन चीन पर भारी आयात निर्भरता के कारण घरेलू उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के लिए तत्काल नीतिगत सहायता की जरूरत है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन कदमों से 2035 तक इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी दोगुनी हो सकती है और भारत 50 अरब डॉलर का निर्यात केंद्र बन सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार और नेटवर्क उपकरण क्षेत्र आधुनिक वैश्विक संचार व्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इस समय यह गंभीर व्यापार असंतुलन का सामना कर रहा है। लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप से यह क्षेत्र राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2025 के सार्वभौमिक कनेक्टिविटी और निर्यात से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

2020 से 2024 के बीच भारत से दूरसंचार और नेटवर्क उपकरणों का निर्यात कुल निर्यात का केवल 0.2-0.3 प्रतिशत रहा। इसका सालाना मूल्य करीब 60 करोड़ से 1 अरब डॉलर रहा। इसके मुकाबले इस क्षेत्र में भारत का सालाना आयात 4-5 अरब डॉलर का रहा, जो कुल आयात का 0.7-1.1 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया कि महत्वपूर्ण उपकरणों और घटकों, जैसे 4जी/5जी एंटीना और सिग्नल प्रोसेसर, के लिए भारत 80 प्रतिशत से अधिक आयात पर चीन पर निर्भर है।

दूरसंचार उपकरणों का उत्पादन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर है। उदाहरण के लिए, भारत में बने 5जी बेस स्टेशन में ताइवान के चिपसेट, जापान के ऑप्टिकल ट्रांसीवर और अमेरिका में तैयार तकनीकी डिजाइन शामिल हो सकते हैं। ऐसे में किसी एक देश से आपूर्ति प्रभावित होने पर भारतीय कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य दूरसंचार उपकरण बनाने वाली भारतीय कंपनियों को उच्च मूल्य वाले दूरसंचार उत्पादों के निर्माण में वैश्विक कंपनियों की तुलना में 26 प्रतिशत तक अधिक वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है। कुछ उत्पादों में, जहां आयात पर लंबे समय के लिए खरीदार को ऋण की सुविधा मिलती है, यह अंतर 29 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

भारत में उपकरण निर्माण अभी भी मुख्य रूप से कम मूल्य वाले जोड़ने और तैयार करने के काम तक सीमित है। घरेलू स्तर पर उत्पाद में जोड़ा जाने वाला मूल्य अक्सर 20 प्रतिशत से भी कम रहता है।

सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) समेत कई कदम उठाए हैं। नीति आयोग के अनुसार, ऐसी सहायता जारी रहने से दूरसंचार और नेटवर्क उपकरण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 1-1.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

इससे करीब 5 लाख कुशल रोजगार पैदा होने और 2035 तक भारत को 50 अरब डॉलर का दूरसंचार उपकरण निर्यात केंद्र बनाने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि मजबूत सरकारी हस्तक्षेप घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2025 के तहत उत्पादन में 150 प्रतिशत वृद्धि और आयात में 50 प्रतिशत कमी के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।