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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 03 अगस्त। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा एवं खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा एनालॉग पनीर तथा अन्य डेयरी एनालॉग उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण एवं विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है।
इस संबंध में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा साेमवार काे अधिसूचना जारी की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने जिले के सभी खाद्य कारोबार संचालकों, डेयरी उत्पाद निर्माताओं, थोक एवं फुटकर विक्रेताओं से शासन के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने की अपील की है। विभाग ने बताया कि यह निर्णय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया गया है।
विभागीय परीक्षण, प्रयोगशाला विश्लेषण एवं जोखिम मूल्यांकन में यह पाया गया कि कुछ उत्पाद वास्तविक दूध से निर्मित नहीं होने के बावजूद पनीर, क्रीम, मक्खन अथवा अन्य दुग्ध उत्पादों के रूप में उपभोक्ताओं के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने तथा उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। प्रतिबंध के अंतर्गत ऐसे सभी उत्पाद शामिल हैं, जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया गया हो अथवा जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या प्रदर्शन से उन्हें वास्तविक दुग्ध उत्पाद होने का आभास होता हो। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ एवं मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे विधिवत मानकीकृत उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में शामिल नहीं हैं।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार यह प्रतिबंध राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा अंतिम नियम जारी किए जाने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। विभाग ने सभी संबंधित प्रतिष्ठानों से उपभोक्ता हित एवं खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन के निर्देशों का पूर्णतः पालन करने का आग्रह किया है।