श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल

Posted on: 2026-07-07


कोलकाता, 07 जुलाई । तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो संदेश में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिन लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है, उन्हें जवाब मिलना चाहिए।

मोइत्रा ने कहा कि फरवरी 2020 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में इस ट्रस्ट की घोषणा की थी और इसके बाद गृह मंत्रालय ने 15 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ट्रस्ट का गठन सरकार की अधिसूचना के माध्यम से हुआ और इसका संचालन आम जनता के दान से होता है, तो इसे निजी ट्रस्ट बताकर सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर क्यों रखा गया।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में ट्रस्ट की जानकारी मांगने पर आरटीआई आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि यह निजी ट्रस्ट है। बाद में केंद्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय की ओर से यह कहा गया कि ट्रस्ट से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। महुआ ने इसे "ब्लैक बॉक्स" व्यवस्था बताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि ट्रस्ट के मूल 15 सदस्यों में से चार सदस्य सीधे केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़े अधिकारी हैं, जबकि अन्य कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से जुड़े बताए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यह नहीं कह सकते कि उन्हें ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी, क्योंकि ट्रस्ट में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी पदेन सदस्य हैं।

सांसद ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी नृत्यगोपाल दास और कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने स्वयं कहा कि उनके पास वित्तीय लेन-देन पर हस्ताक्षर का अधिकार नहीं था और उन्हें खातों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक नियंत्रण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के हाथ में था।

महुआ मोइत्रा ने वर्ष 2021 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने निर्माण कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशनखोरी का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया। इसी तरह, लेखा प्रबंधन से जुड़े महिपाल सिंह ने भी वित्तीय अनियमितताओं और सीसीटीवी फुटेज हटाने की बात उठाई थी, लेकिन उन्हें भी पद से हटा दिया गया।

महुआ ने आरोप लगाया कि जून 2026 में ट्रस्ट के भीतर दान राशि के बंटवारे को लेकर विवाद सामने आया। उनके अनुसार, इसके बाद एक विशेष जांच दल गठित किया गया, लेकिन जांच रिपोर्ट उसी अधिकारी को सौंपी गई जो स्वयं ट्रस्ट का पदेन सदस्य है। उन्होंने कहा कि बाद में दर्ज एफआईआर केवल कुछ संविदा कर्मियों के खिलाफ हुई, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उनके खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि 700 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितता के बावजूद ट्रस्ट के शीर्ष जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और जिन लोगों ने अपनी श्रद्धा से एक रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक का दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके धन का उपयोग किस प्रकार हुआ। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।