काठमांडू, 05 जुलाई। नेपाल के चितवन जिले में आज सुबह करीब पांच बजे जंगली हाथी 'ध्रुवे' के हमले में एक महिला और उसके चार वर्षीय बेटे की मौत हो गई। जिला प्रहरी कार्यालय के सूचना अधिकारी चन्द्रभूषण यादव के अनुसार, ध्रुवे ने 21 वर्षीय आशिका बोटे और उनके चार वर्षीय बेटे भरत बोटे पर घर पर सोते समय हमला किया। हमले में दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
जिला प्रहरी कार्यालय के सूचना अधिकारी यादव के अनुसार, हाथी को भगाने के प्रयास में आशिका के पति पूर्ण बोटे ने आग जलाई, लेकिन इस कवायद में उनका फूस का घर भी जलकर राख हो गया। पुलिस और स्थानीय लोगों की सहायता से आग पर काबू पाया गया।
भरतपुर महानगरपालिका-23 के वार्ड अध्यक्ष दीपक दवाड़ी ने घटना की पुष्टि की है। इस घटना के साथ ही 'ध्रुवे' के हमलों में जान गंवाने वालों की संख्या 25 हो गई है। वर्ष 2018 में नेपाली सेना के एक मेजर की हत्या करने के लगभग नौ वर्ष बाद ध्रुवे ने फिर दो लोगों की जान ली है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ध्रुवे अधिकतर चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज के सुखीभार क्षेत्र में रहता है। कभी-कभी अचानक बस्तियों और मेघौली क्षेत्र की ओर भी निकल आता है।
ध्रुवे ने वर्ष 2010 से इंसानों पर हमले शुरू किए। चितवन के माडी क्षेत्र में उसका आतंक काफी अधिक रहा। उसे मारने के लिए करीब 16 लाख नेपाली रुपये खर्च किए गए, लेकिन सेना की गोली से बचकर वह भाग निकला और लगभग पांच वर्ष तक लापता रहा। बाद में वह फिर सुखीभार क्षेत्र में दिखाई देने लगा। वन्यजीव प्रबंधन के तहत ध्रुवे के गले में कई बार रेडियो कॉलर लगाया गया और उसके दांत भी काटे गए। उसे बेहोश कर ट्रैकिंग उपकरण लगाया गया तथा उसके आक्रामक व्यवहार को कम करने के लिए दवाइयां भी दी गईं।
हाल के महीनों में शांत दिखाई देने वाला ध्रुवे कुछ समय पहले सौराहा क्षेत्र में जंगली हाथी 'रोनाल्डो' से भिड़ गया था। संघर्ष में हारने के बाद वह फिर सुखीभार क्षेत्र में अन्य मादा हाथियों के साथ रहने लगा। चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज में रोनाल्डो, गोविन्दे और ध्रुवे जैसे कई जंगली नर हाथी मौजूद हैं।