नेपाल की 18 कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग जांच के दायरे में

Posted on: 2026-06-22


काठमांडू, 22 जून। नेपाल में मनी लॉन्ड्रिंग, प्रतिभूति, बीमा और बैंकिंग अपराध से जुड़े मामलों में संलिप्त होने की आशंका में १८ कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग अब जांच के दायरे में है।

व्यवसायी दीपक भट्ट सहित विभिन्न व्यावसायिक समूहों के प्रभावशाली कारोबारियों के नाम सामने आने के बाद उनसे जुड़ी कंपनियों के एक खरब रुपये से अधिक के कॉर्पोरेट ऋण और निवेश जोखिम निगरानी में आ गए हैं।

नेपाल में क्रेडिट रेटिंग करने वाली इन्फोमेरिक्स क्रेडिट रेटिंग नेपाल (आईसीआरएनएल) ने मामले में जुड़े प्रवर्तक, निदेशक और प्रमुख प्रबंधन अधिकारियों से संबद्ध 18 कंपनियों की रेटिंग को ‘क्रेडिट वॉच विद नेगेटिव इम्प्लिकेशन्स’ में रखा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति तत्काल कमजोर हो गई है, लेकिन भविष्य में संभावित जोखिम बढ़ने के संकेत जरूर मिले हैं।

निगरानी में रखी गई अधिकांश कंपनियां उत्पादन, व्यापार, सेवा और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी हैं। इन्फोमेरिक्स नेपाल के अनुसार कंपनियों के कारोबार संचालन, वित्तीय स्थिति, संस्थागत सुशासन और प्रबंधन की निरंतरता पर कानूनी प्रक्रिया के संभावित प्रभाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

सरकार ने हाल ही में प्रतिभूति अपराध से जुड़े मामलों में 81 लोगों, बीमा अपराध में 42 लोगों, मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों में 39 लोगों और बैंकिंग अपराध से जुड़े मामलों में 5 लोगों को आरोपी बनाकर अदालत में मुकदमा दायर किया है।

इन आरोपियों में कुछ ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जो सार्वजनिक कंपनियों और बड़े निजी व्यावसायिक समूहों में शीर्ष पदों पर कार्यरत हैं।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के अनुसार यदि कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचती है तो इससे कंपनियों की निर्णय प्रक्रिया, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, बैंकों और निवेशकों का भरोसा तथा बाजार में प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। इसी कारण इन कंपनियों की रेटिंग को विशेष निगरानी में रखा गया है।

हालांकि इन्फोमेरिक्स नेपाल ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कंपनियां अभी दोषी साबित नहीं हुई हैं। रेटिंग निगरानी का उद्देश्य केवल कानूनी अनिश्चितताओं के कारण संभावित जोखिमों का आकलन करना है।

एजेंसी ने कहा है कि अदालत के अंतिम फैसले, प्रबंधन में संभावित बदलाव और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में रेटिंग घटाने, यथावत रखने या पुनर्मूल्यांकन करने का निर्णय लिया जाएगा।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बड़े व्यावसायिक समूहों से जुड़ी कंपनियों के निगरानी में आने के बाद बैंक, वित्तीय संस्थानों, निवेशकों और ऋणदाताओं को इन कंपनियों के जोखिम प्रोफाइल का और अधिक गहराई से मूल्यांकन करना होगा। विश्लेषकों के अनुसार इस घटनाक्रम ने नेपाल के कॉर्पोरेट क्षेत्र में सुशासन और पारदर्शिता को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।