केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को वर्चुअल माध्यम से जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना सुविधाओं के विकास हेतु केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 401.50 करोड़ रुपये की मूल स्वीकृति की पहली किस्त जारी की।
नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित एक बैठक के दौरान पीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि जारी की गई। इस पहल का उद्देश्य देशभर के जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और न्यायिक सुविधाओं में सुधार के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों का समर्थन करना है। उच्च न्यायालयों और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।
सभा को संबोधित करते हुए मेघवाल ने न्याय की सुगमता के लक्ष्य को प्राप्त करने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए पर्याप्त न्यायिक अवसंरचना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि योजना का वर्तमान कार्यकाल 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो गया है और इसे अगले पांच वर्षों यानी 2030-31 तक बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। वित्त मंत्रालय ने योजना को 30 सितंबर, 2026 तक अस्थायी रूप से विस्तारित कर दिया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि अदालतों में आने वाले नागरिकों की सुविधाओं में सुधार के लिए योजना के तहत "मुकदमेबाजों के लिए प्रतीक्षा कक्ष" नामक एक नया घटक प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने आगे बताया कि देश भर में एक एकीकृत न्यायिक अवसंरचना प्रणाली विकसित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता में भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 12 मई, 2026 को एक "न्यायिक अवसंरचना सलाहकार समिति" का गठन किया गया था।
बैठक के दौरान, न्याय विभाग के सचिव ने 1993-94 से जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र द्वारा किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला।
एक प्रस्तुति में योजना के तहत हासिल की गई प्रगति को प्रदर्शित किया गया, जिसके अंतर्गत शुरुआत से अब तक 12,844.72 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिसमें से 9,400.41 करोड़ रुपये, यानी 73 प्रतिशत से अधिक राशि पिछले 12 वर्षों में जारी की गई है। योजना के तहत 31 मार्च, 2026 तक 6,345 न्यायालय भवन और 4,023 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में 3,161 न्यायालय भवन और 3,245 आवासीय इकाइयों का निर्माण कार्य चल रहा है।
मेघवाल ने न्याय विभाग की न्यायिक सुधारों पर क्रियात्मक अनुसंधान और अध्ययन योजना के तहत तैयार की गई तीन क्रियात्मक अनुसंधान रिपोर्ट भी जारी कीं। यह योजना न्याय वितरण और कानूनी सुधारों से संबंधित अनुसंधान के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
इसके अतिरिक्त, मंत्री ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के विधि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से पूर्वोत्तर के आदिवासी समुदायों के पारंपरिक कानूनों को प्रलेखित करने वाली तीन ई-पुस्तकों का विमोचन किया। इन प्रकाशनों में असम के ह्रांगखोल और बियाते तथा असम और मेघालय के हाजोंग समुदाय जैसी जनजातियों की पारंपरिक कानूनी प्रथाओं को शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य स्वदेशी कानूनी परंपराओं को संरक्षित करना और कानूनी साक्षरता को मजबूत करना है।