नई दिल्ली, 08 मई । राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गुजरात में कामरेज-चलथान खंड (एनएच-48) के छह लेन परियोजना से जुड़े मध्यस्थता मामले में जीत हासिल की है। ठेकेदार द्वारा किए गए लगभग 174 करोड़ रुपये के दावों में से मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने केवल 54 लाख रुपये का ही भुगतान करने का आदेश दिया।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले से सार्वजनिक धन की बड़ी बचत हुई है और एनएचएआई की अनुबंध प्रबंधन क्षमता तथा डिजिटल निगरानी प्रणाली की मजबूती सामने आई है। मामला 15 किलोमीटर लंबे कामरेज–चलथान खंड को चार लेन से छह लेन करने की परियोजना से जुड़ा था, जिसमें कामरेज–भरूच खंड पर चार ब्लैक स्पॉट्स के लिए दीर्घकालिक सुधारात्मक उपाय शामिल किए गए थे। परियोजना जून 2016 में एससीआईडब्ल्यू–यूनिक कंस्ट्रक्शन (जेवी) को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड में 241.41 करोड़ रुपये की लागत पर दी गई थी। काम को 21 मार्च 2017 को शुरू करने की घोषणा की गई। उस समय जब 87.75 प्रतिशत भूमि उपलब्ध थी।
मंत्रालय ने बताया कि निर्माण के दौरान ठेकेदार ने भूमि संबंधी बाधाओं का हवाला दिया और धीमी प्रगति दिखाई। केवल सड़क और जल निकासी से जुड़े साधारण कार्य किए गए, जबकि प्रमुख संरचनाओं और फ्लाईओवरों का विकास नहीं किया गया। लगातार प्रदर्शन में कमी के कारण 11 मई 2020 को अनुबंध को आपसी सहमति से समाप्त कर दिया गया, उस समय परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 49.79 प्रतिशत थी। अनुबंध समाप्ति के समय दोनों पक्षों ने सभी दावों को निपटाने पर सहमति जताई थी और ठेकेदार ने भविष्य में कोई दावा न करने का वचन दिया था।
इसके बावजूद, 2022 में ठेकेदार ने एनएचएआई के खिलाफ मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की और 174 करोड़ रुपये का दावा किया। एनएचएआई ने न्यायाधिकरण के समक्ष विस्तृत दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनमें ड्रोन वीडियोग्राफी, डिजिटल परियोजना रिकॉर्ड और तकनीकी दस्तावेज शामिल थे। इनसे साबित हुआ कि छह लेन कार्यों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध थी और जल निकासी का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका था। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि ठेकेदार ने प्रमुख संरचनाओं और फ्लाईओवरों का निर्माण नहीं किया, जिससे अनुबंध समाप्त कर दिया गया।
इसके बाद इसी साल 10 मार्च को दिए गए फैसले में न्यायाधिकरण ने लगभग सभी दावों को खारिज कर दिया और केवल 54 लाख रुपये का भुगतान ठेकेदार के पक्ष में किया।