इन्वेस्ट इंडिया ने FY 2025-26 में 6.1 अरब डॉलर के निवेश को दी गति, 31 हजार से अधिक रोजगार की उम्मीद

Posted on: 2026-04-30


इन्वेस्ट इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की 60 परियोजनाओं को सुगम बनाया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत काम करने वाली इस एजेंसी के प्रयासों से 14 राज्यों में निवेश हुआ, जिससे 31,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

यूरोप से सबसे ज्यादा निवेश

कुल निवेश में लगभग 42% हिस्सेदारी यूरोपीय देशों की रही, जो भारत-यूरोप के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। इसके अलावा अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की निरंतर भागीदारी भारत के नियामक वातावरण और विनिर्माण क्षमताओं में वैश्विक भरोसे को मजबूत करती है।

नीतिगत स्पष्टता से बढ़ा निवेश

डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि निवेश में तेजी नीतिगत स्पष्टता और संस्थागत प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने भरोसा जताया कि निवेश को रोजगार, नवाचार और दीर्घकालिक मूल्य में बदलने के लिए प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा।

निवेश प्रक्रिया में समग्र सहयोग

इन्वेस्ट इंडिया ने निवेश के हर चरण—प्रारंभिक सलाह से लेकर निवेश के बाद की देखभाल तक—सुविधा को मजबूत किया है। एजेंसी नेटवर्क आधारित दृष्टिकोण के जरिए निवेशकों को आपूर्ति श्रृंखला और घरेलू कंपनियों से जोड़ रही है, जिससे संयुक्त उद्यमों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

उच्च मूल्य वाले निवेश में वृद्धि

वित्त वर्ष 2024-25 में वास्तविक निवेश में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि औसत सौदे का आकार 1.8 गुना बढ़ा। यह उच्च मूल्य वाली परियोजनाओं की ओर झुकाव को दर्शाता है।

निवृत्ति राय ने बताई रणनीतिक भूमिका

इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ति राय ने कहा कि 31,000 से अधिक नौकरियों का सृजन और निवेश में वृद्धि, नीतिगत समर्थन और निवेशक विश्वास का परिणाम है। उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में इस गति को बनाए रखने की बात कही।

कौन से सेक्टर रहे आगे

रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में लगभग 65% निवेश हुआ। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, रक्षा और ऑटो/ईवी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी तेजी देखी गई।

राज्यों में निवेश का विस्तार

गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश प्रमुख निवेश केंद्र बनकर उभरे, जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी परियोजनाओं में सुधार हुआ। असम, बिहार और सिक्किम जैसे नए क्षेत्रों में निवेश की शुरुआत से निवेश परिदृश्य का विस्तार दिखा। रोजगार सृजन में मध्य प्रदेश अग्रणी रहा।

नीतिगत पहलों का दिखा असर

‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं जैसी पहलों ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत किया है। ये प्रयास देश को प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय निवेश गंतव्य बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।