नई दिल्ली, 27 अप्रैल । पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका और इजराइल युद्ध के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा, विदेश नीति और खाद उपलब्धता पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले तेल और गैस की आपूर्ति में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इसके बावजूद देश में एलपीजी और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है। भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। खाड़ी देशों के साथ संपर्क बढ़ाया जा रहा है और किसी भी तरह की कमी या संकट की आशंका नहीं है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने यहां राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में रोजाना होने वाली अंतर्मंत्रालयी पत्रकार वार्ता में बताया कि वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन 70 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। अप्रैल माह में अबतक 1.65 लाख टन से अधिक वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री हो चुकी है। अब तक 93 प्रतिशत सिलेंडर डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के माध्यम से की जा रही है। कुछ जगहों पर पैनिक बाइंग देखी जा रही है, लेकिन एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति है और किसी भी वितरक पर कमी नहीं है।
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक मंदीप सिंह रंधावा ने कहा कि 25 अप्रैल को ओमान के शिनास पोर्ट पर टोगो-ध्वज वाले रासायनिक टैंकर एमटी सिरोन पर कुछ लोग चढ़ गए थे। ईरानी कोस्ट गार्ड ने हस्तक्षेप कर चेतावनी दी। सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी भी भारतीय जहाज पर असर नहीं पड़ा है।डीजी शिपिंग कंट्रोल रूम ने पिछले 24 घंटे में 7,780 कॉल और 16,650 ईमेल संभाले हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर भारत ने खाड़ी देशों के साथ संपर्क बढ़ाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 25-26 अप्रैल को यूएई का दौरा किया और राष्ट्रपति से मुलाकात कर प्रधानमंत्री के शुभकामनाएं दीं। दोनों पक्षों ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा की। यह एक महीने में भारत से यूएई की दूसरी उच्च स्तरीय यात्रा है। इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 11-12 अप्रैल को यूएई का दौरा किया था।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने कहा कि देश में खाद की उपलब्धता आवश्यकता से कहीं अधिक है। 1 अप्रैल से 26 अप्रैल तक यूरिया की उपलब्धता 71.58 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि आवश्यकता 18.17 लाख मीट्रिक टन थी। इसी तरह डीएपी की उपलब्धता 22.35 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि आवश्यकता 5.90 लाख मीट्रिक टन थी। उन्होंने कहा कि खाद सुरक्षा मजबूत, स्थिर और सुचारू है और कहीं कोई कमी नहीं है।