भारत निर्वाचन आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में फॉर्म 17ए (मतदाता रजिस्टर) की जांच पूरी हो चुकी है। निर्वाचन आयोग ने मतदान के बाद की जांच और मतदान दिवस के अन्य अभिलेखों के लिए समेकित निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, मतदान केंद्रों पर किसी भी अनियमितता का पता लगाना और जहां आवश्यक हो वहां पुनर्मतदान की सिफारिश करना है।
चुनाव आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल की उन सभी 152 विधानसभा सीटों पर, जहां पहले चरण का मतदान हुआ था, दस्तावेजों की जांच सुचारू रूप से संपन्न हुई। आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा सामान्य पर्यवेक्षकों और 600 से अधिक उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संचालित की गई। आयोग ने यह भी बताया कि सभी 1478 उम्मीदवारों को जांच की तिथि, समय और स्थान के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था।
चुनाव आयोग ने आगे बताया कि तमिलनाडु में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई, जहां सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में आम पर्यवेक्षकों और 1825 उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मतगणना पूरी की गई। आयोग ने कहा कि व्यापक मतगणना प्रक्रिया चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता को मजबूत करती है और हितधारकों के बीच अधिक विश्वास सुनिश्चित करती है।