बेंगलुरु, 13 फरवरी । बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) परिसर में शुक्रवार को ‘अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन–2026’ का उद्घाटन कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया। सम्मेलन का उद्देश्य बांध सुरक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
“सुरक्षित और संरक्षित बांध” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित कई देशों के जल संसाधन विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बांध केवल इंजीनियरिंग संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि वे कृषि, उद्योग, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा कि नेहरू ने बांधों को “आधुनिक भारत का मंदिर” बताया था, जो आज भी देश के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत में कुल 6,628 निर्दिष्ट बांध हैं और इस संख्या के आधार पर भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। कर्नाटक में 231 बांध हैं और उनकी कुल स्थापित जलविद्युत क्षमता लगभग 4,800 मेगावाट है। राज्य की प्रमुख नदियों, जैसे कृष्णा नदी और कावेरी नदी पर बने जलाशय सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा, सूखा, जलाशयों में गाद जमाव और साइबर सुरक्षा जैसे नए खतरे बांधों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 70 प्रतिशत बांध 25 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जिससे उनकी नियमित जांच, रखरखाव और आधुनिकीकरण अत्यंत आवश्यक हो गया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बांध सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जन सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। किसी भी प्रकार की चूक से बड़े पैमाने पर जनहानि और आर्थिक नुकसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, तकनीकी संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और वित्तीय संस्थाओं के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने बांधों की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीकों, नियमित सुरक्षा ऑडिट, डेटा विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने पर बल दिया।
सम्मेलन में राज्य के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री डी.के. शिवकुमार, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, विश्व बैंक के उपाध्यक्ष जोहान्स कॉर्नेल्स मारिया जट्ट, केंद्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, जापान के जल आपदा अनुसंधान विशेषज्ञ प्रो. तोशियो कोइके, बड़े बांधों पर अंतरराष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष डी.के. शर्मा और आईआईएससी के डीन प्रो. सत्यम सुवास सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, जोखिम प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान आदान-प्रदान और नवीन तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।