धनतेरस पर सोने-चांदी और बर्तनों की खरीदारी की परंपरा, बाजारों में उमड़ेगी ग्राहकों की भीड़

Posted on: 2026-11-06


भारत त्योहारों और परंपराओं का देश है, जहां हर पर्व अपने साथ खुशियों, उमंग और सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है। इन्हीं प्रमुख त्योहारों में धनतेरस का विशेष महत्व है। दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला यह पर्व सुख-समृद्धि, धन-धान्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से पांच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत होती है। देशभर में धनतेरस का त्योहार पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। घरों में साफ-सफाई, सजावट, रंगोली और दीपों की रोशनी के बीच लोग इस पर्व का स्वागत करते हैं। मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य बना रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस का पर्व केवल धन और संपत्ति से ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अपने और अपने परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। यही वजह है कि धनतेरस को आरोग्य का पर्व भी कहा जाता है।


इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण पक्ष खरीदारी की परंपरा है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, आभूषण और नए घरेलू सामान खरीदना शुभ माना जाता है। बाजारों में इस अवसर पर विशेष रौनक देखने को मिलती है। ज्वेलरी की दुकानों से लेकर बर्तन बाजार, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम और कपड़ों की दुकानों तक ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है। लोग अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार खरीदारी करते हैं। कई परिवार इस दिन चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और पूजा से जुड़ी सामग्री खरीदना पसंद करते हैं। हालांकि धनतेरस पर खरीदारी का वास्तविक संदेश केवल अधिक धन खर्च करना नहीं, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार शुभ वस्तुओं को घर लाना और खुशियों को साझा करना है। इस दिन झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। मान्यता है कि झाड़ू घर से नकारात्मकता और दरिद्रता को दूर करने का प्रतीक है। धनतेरस के दिन घर के मुख्य द्वार को फूलों, आम के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है। शाम के समय परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है।


इसके बाद दीपक, धूप, फूल, फल और मिठाइयों से पूजा की जाती है। परिवार के सदस्य सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना करते हैं। धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। मान्यता के अनुसार, इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की सुख-समृद्धि और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। इसे यमदीपम भी कहा जाता है। यह परंपरा जीवन के महत्व और परिवार की सुरक्षा के प्रति हमारी आस्था को दर्शाती है। धनतेरस का पर्व भारतीय संस्कृति में आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है। त्योहार के अवसर पर बाजारों में व्यापार बढ़ता है और छोटे-बड़े कारोबारियों को रोजगार और आमदनी के नए अवसर मिलते हैं। कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीपक, स्थानीय कारीगरों के सजावटी सामान, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। इस तरह यह त्योहार स्थानीय व्यापार और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का अवसर भी बनता है। धनतेरस के अवसर पर मिट्टी के दीपक और स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी करके छोटे व्यापारियों और कारीगरों का सहयोग किया जा सकता है।


आधुनिक समय में धनतेरस मनाने के तरीकों में भी बदलाव आया है। पहले जहां लोग मुख्य रूप से सोने-चांदी और बर्तनों की खरीदारी करते थे, वहीं अब वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू उपकरण और अन्य उपयोगी वस्तुएं भी खरीदते हैं। ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन ने भी इस त्योहार को नया रूप दिया है। इसके बावजूद पारंपरिक पूजा, दीपदान और परिवार के साथ खुशियां बांटने की भावना आज भी कायम है। धनतेरस हमें यह भी याद दिलाता है कि वास्तविक धन केवल पैसा और संपत्ति नहीं है, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, परिवार का प्रेम, आपसी सहयोग और मन की शांति भी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यदि व्यक्ति स्वस्थ है, परिवार में प्रेम और विश्वास है तथा जीवन में संतोष है, तो यही सबसे बड़ी समृद्धि है। इस पर्व को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना भी जरूरी है। मिट्टी के दीपक जलाना, जरूरत के अनुसार खरीदारी करना, प्लास्टिक की सजावट से बचना और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देना त्योहार की खुशियों को और सार्थक बना सकता है। साथ ही बाजारों में खरीदारी करते समय सावधानी बरतना, बिजली से चलने वाले उपकरणों की गुणवत्ता जांचना और सोने-चांदी की खरीदारी में हॉलमार्क तथा प्रमाणिकता का ध्यान रखना भी जरूरी है। धनतेरस का त्योहार हमें मेहनत, ईमानदारी, स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच के महत्व का संदेश देता है।


यह पर्व सिखाता है कि जीवन में धन कमाने के साथ-साथ उसका सदुपयोग करना और दूसरों की खुशियों का ध्यान रखना भी जरूरी है। दीपों की रोशनी, पूजा की सुगंध, बाजारों की चहल-पहल और परिवार के साथ बिताए गए खूबसूरत पल इस त्योहार को खास बनाते हैं। धनतेरस केवल खरीदारी और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में नई उम्मीदों, नए संकल्पों और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व हर घर में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना के साथ दीपावली के स्वागत का सुंदर संदेश लेकर आता है।