इस अवसर पर बहामास के हाई कमिश्नर पीटर निकोलस सिमोनेट जूनियर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट से जुड़ा इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन यानी सदस्यता स्वीकार करने का आधिकारिक दस्तावेज सौंपा। उन्होंने यह दस्तावेज ISA के संयुक्त सचिव, आर्थिक कूटनीति और डिपॉजिटरी प्रमुख पीएस गंगाधर को सौंपा। दस्तावेजों का यह औपचारिक हस्तांतरण नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल सोलर अलायंस की नौवीं असेंबली के सत्र के दौरान हुआ। इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ बहामास की ISA सदस्यता को औपचारिक रूप मिला।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस की स्थापना सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। भारत और फ्रांस की पहल पर शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय संगठन का मुख्य लक्ष्य सदस्य देशों में सौर ऊर्जा के उत्पादन, तकनीक और निवेश को प्रोत्साहित करना है। संगठन विशेष रूप से उन देशों को सहयोग उपलब्ध कराने पर ध्यान देता है, जहां वर्षभर पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है और सौर ऊर्जा के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। ISA के माध्यम से सदस्य देश सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने और निवेश को आकर्षित करने की दिशा में मिलकर काम करते हैं।
बहामास जैसे द्वीपीय देशों के लिए सौर ऊर्जा का विशेष महत्व है। ऐसे देश अक्सर ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहते हैं। इससे ऊर्जा की लागत बढ़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सौर ऊर्जा को अपनाने से इन चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गति मिलेगी।
बहामास की सदस्यता ISA के वैश्विक विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बहामास को तकनीकी सहयोग, निवेश और अन्य सदस्य देशों के अनुभवों का लाभ मिल सकता है। वहीं, संगठन को भी कैरेबियाई क्षेत्र में अपनी गतिविधियों और सहयोग का दायरा बढ़ाने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर बहामास का 116वें सदस्य के रूप में शामिल होना सौर ऊर्जा को वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने और टिकाऊ विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है