दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली INDIA ब्लॉक की महारैली से पहले देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचने से रोकने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया है कि तेलंगाना में दिल्ली आने वाली विशेष ट्रेनों की व्यवस्था रद्द कर दी गई है और कई लोगों को रैली में शामिल होने से रोका जा रहा है। गुरुवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे पवन खेड़ा ने कहा कि कई राज्यों में इस तरह का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन विपक्ष अपने कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दावा किया कि रैली में शामिल होने के लिए लोगों की संख्या उम्मीद से अधिक होगी। कांग्रेस के इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है
दरअसल, तेलंगाना कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली में होने वाली रैली के लिए विशेष ट्रेनें उपलब्ध नहीं कराने के विरोध में 28 अक्टूबर को सिकंदराबाद स्थित दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने किया। उनके साथ राज्य सरकार के मंत्री पोनम प्रभाकर, सांसद, विधायक और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनों की मांग की थी, लेकिन रेलवे ने अंतिम समय में इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में भी लिया। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
हालांकि, दक्षिण मध्य रेलवे ने कांग्रेस के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विशेष ट्रेन चलाने के लिए पर्याप्त समय पहले अनुरोध करना जरूरी होता है। रेलवे के मुताबिक, सिकंदराबाद से दिल्ली तक विशेष ट्रेन चलाने के लिए इंजन, डिब्बों, कर्मचारियों, रखरखाव और अलग-अलग रेलवे जोन के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है। इसके अलावा नियमित ट्रेनों के संचालन को प्रभावित किए बिना नया समय निर्धारित करना भी जरूरी है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की ओर से अनुरोध काफी कम समय पहले किया गया था, इसलिए परिचालन संबंधी कारणों से विशेष ट्रेन की व्यवस्था नहीं हो सकी। रेलवे ने यह भी कहा कि इस निर्णय को किसी राजनीतिक दल के प्रति असहयोग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।