गुजरात ने युवाओं के लिए राज्यव्यापी सांस्कृतिक भाषण प्रतियोगिता शुरू की

Posted on: 2026-09-29


गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात सांस्कृतिक भाषण प्रतियोगिता-2026 का शुभारंभ करते हुए इसे युवाओं में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने, नेतृत्व और सार्वजनिक भाषण कौशल विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच बताया है।

गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, यह प्रतियोगिता राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग और सेव कल्चर सेव इंडिया फाउंडेशन की संयुक्त पहल के माध्यम से पूरे राज्य में आयोजित की जा रही है।

इस शुभारंभ के अवसर पर शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा, शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा और सेव कल्चर सेव इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक और पूर्व आरटीआई आयुक्त उदय माहुरकर भी उपस्थित थे।

पटेल ने 'विकसित भारत @ 2047' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न को साकार करने में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के जनसांख्यिकीय लाभांश को ज्ञान, अच्छे चरित्र, विनम्रता, बुद्धिमत्ता, मूल्यों और अनुशासन के साथ पोषित करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार बच्चों और युवाओं में सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने और उन्हें व्यसन से दूर रखने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव ला रही है।

खेल, स्वास्थ्य और 'नशा मुक्त भारत' के लक्ष्य के महत्व का उल्लेख करते हुए, पटेल ने युवाओं से भाषण प्रतियोगिता जैसी पहलों के माध्यम से सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने का आग्रह किया।

गुजरात सांस्कृतिक भाषण प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक भाषण, आलोचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल विकसित करना है।

इस पहल के अंतर्गत, राज्य भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ऑनलाइन और ऑफलाइन सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। छात्रों को सार्वजनिक भाषण, नेतृत्व, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों तथा आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

यह प्रतियोगिता चार चरणों में आयोजित की जाएगी।

कक्षा स्तर पर, छात्र तीन मिनट के स्क्रीनिंग राउंड में भाग लेंगे, जिसमें प्रत्येक कक्षा से तीन छात्रों का चयन किया जाएगा। भाग लेने वाले सभी छात्रों को प्रमाण पत्र प्राप्त होंगे।

महाविद्यालय स्तर पर, चयनित छात्र गुजरात भर के सरकारी, सहायता प्राप्त और स्व-वित्तपोषित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा करेंगे। 1 जनवरी, 2000 को या उसके बाद जन्मे छात्र भाग लेने के पात्र होंगे।

प्रत्येक संकाय से एक छात्र को क्षेत्रीय दौर के लिए चुना जाएगा। कॉलेज स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को 1,100 रुपये का नकद पुरस्कार, साथ ही 'कॉलेज के सर्वश्रेष्ठ वक्ता' की ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्राप्त होगा।

क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिता 11 क्षेत्रों में आयोजित की जाएगी, जिसमें से 20 प्रतिशत प्रतिभागी राज्य स्तरीय फाइनल के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित प्रत्येक छात्र को 11,000 रुपये के साथ-साथ 'गुजरात के सांस्कृतिक वक्ता' की ट्रॉफी और प्रमाण पत्र भी प्राप्त होगा।

राज्य स्तरीय फाइनल का आयोजन एक शिविर के रूप में किया जाएगा। चयनित छात्र निर्धारित विषयों पर भाषण देंगे और चर्चाओं में भाग लेंगे। प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार विजेताओं को क्रमशः 1 लाख रुपये, 71,000 रुपये और 51,000 रुपये के साथ-साथ 'गुजरात के सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक वक्ता' की ट्रॉफी और प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।

प्रतियोगिता के प्रमुख विषयों में नशा मुक्त भारत अभियान और स्वच्छ साइबर भारत मिशन; 'विकसित भारत @ 2047: आत्मनिर्भर भारत'; 'संस्कृति और मूल्य: एक राष्ट्र के अस्तित्व की नींव'; 'क्रोध के कड़वे फल'; और 'एक भारतीय नागरिक के रूप में कर्तव्य: संविधान का अनुच्छेद 51(ए)' शामिल हैं।

शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और मजबूत करने की जिम्मेदारी युवाओं पर है।

उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता युवाओं को अपने विचार व्यक्त करने और आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे उनके समग्र विकास में योगदान मिलेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत मातृभाषा में शिक्षा पर दिए जा रहे महत्व को रेखांकित करते हुए वाजा ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थी अपनी जड़ों और विरासत से जुड़े रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह जुड़ाव, व्यापक सोच के साथ मिलकर, 'वसुधैव कुटुंबकम' के दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान दे सकता है।

शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रतियोगिता राज्य के युवाओं में सांस्कृतिक मूल्यों को पोषित करने का एक मंच बनेगी।

उदय माहुरकर ने तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण के बीच युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की इस पहल को राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि 'संस्कृति बचाओ भारत' फाउंडेशन इस तरह की पहलों का विस्तार करता रहेगा और युवाओं को सांस्कृतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

युवा जैनाचार्य महर्षि विजयजी महाराज, पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी और पूज्य श्री रमेशभाई ओझा ने प्रतियोगिता की सफलता के लिए अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं।