जयराम रमेश ने विदेश व व्यापार नीति को लेकर मोदी सरकार की निंदा की

Posted on: 2026-09-16


नई दिल्ली, 16 सितंबर कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिकी टैरिफ की धमकी, आव्रजन नियमों में सख्ती और यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के फैसले को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीनेट से पारित होने के बाद अब वहां का निचला सदन भारत पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने वाले विधेयक पर मतदान करने जा रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों पर शिकंजा कसते हुए एच-1बी वीजा की लागत बढ़ा रहा है और नौकरी जाने पर तत्काल निर्वासन के कड़े नियम लागू कर रहा है।

जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि अमेरिकी संसद का निचला सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) एक ऐसे विधेयक पर मतदान करने जा रहा है, जो भारत पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान करता है। अमेरिकी सीनेट पहले ही इस कानून को मंजूरी दे चुकी है। एक तरफ अमेरिकी प्रशासन भारतीय प्रवासियों और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों पर शिकंजा कस रहा है, एच-1बी वीजा की लागत बढ़ाई जा रही है और नौकरी छूटने पर तुरंत निर्वासन के कड़े नियम बनाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मोदी सरकार वॉशिंगटन के सामने पूरी तरह समर्पण की मुद्रा में है।

कांग्रेस महासचिव ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था लागू करने के फैसले को सीधे तौर पर अमेरिकी दबाव से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने इस साल की शुरुआत में यूपीआई के पूरी तरह निःशुल्क होने और इसके कारण अमेरिकी कार्ड कंपनियों वीजा तथा मास्टरकार्ड के बाजार से बाहर होने पर सवाल उठाए थे। इसके दबाव में आकर मोदी सरकार ने शून्य एमडीआर की नीति को खत्म कर दिया।

रमेश ने कहा कि क्या 0.4 प्रतिशत एमडीआर इसलिए तय किया गया है क्योंकि डेबिट कार्ड पर भी 0.4 प्रतिशत शुल्क लगता है? क्या यह फैसला अमेरिकी कार्ड कंपनियों को भारतीय यूपीआई व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाने के लिए लिया गया है? सरकार के उस दावे को भी उन्होंने खारिज किया जिसमें इसे यूपीआई की 'स्थिरता' के लिए जरूरी बताया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे यूपीआई तंत्र को चलाने की वार्षिक लागत लगभग 20,000 करोड़ रुपये है, जो कि केंद्र सरकार के वित्तीय आंकड़े दुरुस्त दिखाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए जाने वाले वार्षिक लाभांश हस्तांतरण के 10 प्रतिशत से भी कम है।