BRICS सम्मेलन में दिखा भारत का बढ़ता प्रभाव, पीएम मोदी के नेतृत्व को मिली वैश्विक मजबूती

Posted on: 2026-09-14


नई दिल्ली में हाल ही में संपन्न 18वां BRICS शिखर सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया। ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक चुनौतियों और बदलती वैश्विक व्यवस्थाओं का सामना कर रही है, भारत ने BRICS की अध्यक्षता को केवल औपचारिक जिम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि सहयोग, संवाद और विकास के नए अवसर के रूप में आगे बढ़ाया।

सर्वसम्मति से स्वीकार हुआ नई दिल्ली घोषणापत्र

12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में BRICS नेताओं ने ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ की भावना के अनुरूप भविष्य की दिशा पर चर्चा की। सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में New Delhi Declaration का सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाना रहा। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विस्तारित BRICS में अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों वाले 11 देश शामिल हैं। इतने विविध समूह में व्यापक सहमति बनाना भारत की कूटनीतिक क्षमता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

व्यावहारिक सहयोग और विकास पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने BRICS को केवल वैश्विक राजनीति पर चर्चा के मंच तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यावहारिक सहयोग और विकास से जोड़ने पर जोर दिया। भारत की अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, सतत जीवनशैली, पारंपरिक ज्ञान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई महत्वपूर्ण पहल सामने आईं। यह भारत की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें वैश्विक सहयोग का अंतिम उद्देश्य आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

दुनिया की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व

BRICS की वर्तमान ताकत भी इस सम्मेलन के महत्व को स्पष्ट करती है। 11 सदस्यीय BRICS समूह दुनिया की लगभग 49.5% आबादी, 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता करना भारत को वैश्विक, आर्थिक और राजनीतिक विमर्श को दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को अधिक समावेशी और विकासोन्मुख बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। भारत ने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने और विकासशील देशों के लिए व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने पर बल दिया। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापक विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें भारत स्वयं को केवल एक उभरती शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि विकासशील देशों के विश्वसनीय साझेदार और उनकी आवाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करता है।

BRICS Bharat Innovates में दिखी भारत की तकनीकी ताकत

सम्मेलन की सफलता केवल नेताओं की बैठकों तक सीमित नहीं रही। BRICS Bharat Innovates Exposition के माध्यम से भारत ने अपनी डीप-टेक और नवाचार क्षमता को भी दुनिया के सामने रखा। इस आयोजन में 37 भारतीय डीप-टेक नवाचारकर्ताओं ने भाग लिया। इससे यह संदेश गया कि नया भारत केवल वैश्विक चुनौतियों पर विचार करने वाला देश नहीं, बल्कि उनके तकनीकी समाधान विकसित करने की क्षमता रखने वाला देश भी है।

द्विपक्षीय बैठकों से रणनीतिक संबंध मजबूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक शैली की एक महत्वपूर्ण विशेषता संवाद और संबंधों को साथ लेकर चलना रही है। BRICS सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकातों ने भारत के व्यापक रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। रूस, चीन, ईरान, मलेशिया और अन्य देशों के नेताओं के साथ बातचीत ने यह दिखाया कि भारत अलग-अलग देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र और संतुलित कूटनीति को आगे बढ़ा रहा है।

विविध समूह को साझा एजेंडे पर लाने की कोशिश

भारत की अध्यक्षता की सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि BRICS अब पहले की तुलना में कहीं अधिक विविध और व्यापक समूह बन चुका है। एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका के देशों की भागीदारी ने इसके भौगोलिक और आर्थिक प्रभाव को बढ़ाया है। ऐसे विविध समूह को एक साझा एजेंडे पर साथ लाने के लिए धैर्य, संवाद और सहमति बनाने की क्षमता की आवश्यकता होती है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान इसी दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी।

घरेलू विकास को वैश्विक सहयोग से जोड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व इस पूरे प्रयास के केंद्र में दिखाई देता है। उनकी सरकार ने भारत की घरेलू विकास यात्रा, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार, सतत विकास, वित्तीय समावेशन और तकनीकी प्रगति को वैश्विक सहयोग के एजेंडे से जोड़ने का प्रयास किया है। BRICS के मंच पर भी भारत ने इसी अनुभव को साझा करते हुए विकासशील देशों के लिए ऐसे समाधान प्रस्तुत करने की कोशिश की, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जा सके।

‘विश्व बंधु’ की भावना का संदेश

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नई दिल्ली BRICS सम्मेलन ने भारत की ‘विश्व बंधु’ की भावना को वैश्विक मंच पर मजबूत किया। भारत ने यह संदेश दिया कि विश्व की बड़ी चुनौतियों का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और साझा जिम्मेदारी से निकलेगा।

बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका

नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न BRICS शिखर सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। सर्वसम्मति से New Delhi Declaration को अपनाया जाना, व्यापक सहयोग का एजेंडा आगे बढ़ना, ग्लोबल साउथ की आवाज को महत्व मिलना और भारत की नवाचार क्षमता का प्रदर्शन—ये सभी उपलब्धियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती कूटनीतिक और रणनीतिक क्षमता को रेखांकित करती हैं।

विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव

यह सम्मेलन भारत की उस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसमें देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ-साथ एक अधिक संतुलित, समावेशी और सहयोगात्मक वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।