लक्ज़मबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ज़ेवियर बेटेल ने सोमवार को वैश्विक स्तर पर भारत की कार्यक्षमता और नेतृत्व की खास तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई वादा करते हैं, तो उस पर अमल भी करते हैं।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया बयान
नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बेटेल ने कहा कि लक्ज़मबर्ग और भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए काफी प्रयास किए हैं। उन्होंने सरकार में अपने 13 साल के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, “आप अपने पड़ोसी नहीं चुन सकते, लेकिन आप अपने दोस्त चुन सकते हैं। और इसलिए यहां आना भी इसी दोस्ती का हिस्सा है। हमने दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिए बहुत कुछ किया है।”
पीएम मोदी के साथ पुराने रिश्ते किए याद
बेटेल ने लक्ज़मबर्ग के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अच्छे संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मैं बहुत भाग्यशाली था कि जब मैं प्रधानमंत्री था, तब आपके प्रधानमंत्री के साथ मेरे अच्छे संबंध थे। आजकल लोकतंत्र होना कोई आम बात नहीं है, और इसके लिए मैं वास्तव में भारतीय नेतृत्व को धन्यवाद देना चाहता हूँ।”
कोविड काल का उदाहरण देते हुए की तारीफ
उन्होंने राजनीतिक वादों को पूरा करने में भारतीय नेतृत्व की कार्यक्षमता की विशेष सराहना की। बेटेल ने कहा, “मुझे आपके और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में जो बात पसंद है, वह यह है कि जब आप कुछ कहते हैं, तो आप उसे करते भी हैं। मैंने इसे कोविड के समय देखा था जब हमारे कुछ साझा प्रोजेक्ट थे। आपके प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम इसे करने जा रहे हैं’। आमतौर पर यूरोप में ऐसा कहने पर चर्चा शुरू हो जाती है कि वादा कैसे पूरा करें। लेकिन भारत में यह शुरुआत भी थी और अंत भी, क्योंकि अगले ही दिन सब कुछ हो गया था। इसलिए मैं आपकी राजनीतिक बयानों को पूरा करने की कार्यक्षमता से प्रभावित हूँ।”
स्वतंत्रता दिवस की बधाई और व्यावहारिक नजरिए पर जोर
बेटेल ने पिछले महीने मनाए गए भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भी बधाई दी। अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने भारत की दोस्ती और नेतृत्व के लिए शुक्रिया अदा किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय झगड़ों को सुलझाने और देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक नजरिए की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, “कुछ देश यह नहीं समझते कि जब आप देशों के बीच संबंध बनाना चाहते हैं, तो व्यावहारिक होना जरूरी है। यह किसी के खिलाफ होना नहीं है; यह लोगों के फायदे के लिए है। मुझे पूरी उम्मीद है कि आजकल जो भी झगड़े चल रहे हैं, उनमें आप उतने ही असरदार साबित होंगे जितने पहले रहे हैं।”
द्विपक्षीय रिश्ते और आर्थिक सहयोग
उन्होंने बताया कि लक्ज़मबर्ग के अर्थव्यवस्था मंत्री सहयोग को और मजबूत करने के लिए अलग-अलग बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने गर्मजोशी से स्वागत के लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया।
डॉ. एस. जयशंकर ने व्यापार और FTA पर दिया जोर
इस बीच डॉ. एस. जयशंकर ने जोर दिया कि व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग भारत-लक्ज़मबर्ग संबंधों के केंद्र में हैं। उन्होंने बेटेल का स्वागत करते हुए भारत-EU FTA के लिए लक्ज़मबर्ग के “बहुत मजबूत समर्थन” का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि समझौते ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है और अब लागू होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तीन दिवसीय दौरे का एजेंडा
ज्ञात हो, बेटेल 7 से 9 सितंबर तक भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। उप-प्रधानमंत्री चेन्नई का भी दौरा करेंगे, जहां वे IIT मद्रास में कार्यक्रमों में शामिल होंगे और नए SES कैंपस का उद्घाटन करेंगे। लक्ज़मबर्ग के डिप्टी पीएम के इन बयानों ने भारतीय नेतृत्व पर उनके भरोसे और दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों को साफ दर्शाया।