90 का दशक माधुरी दीक्षित के करियर का ऐसा दौर था, जब उनकी खूबसूरती और अदाओं की चर्चा हर तरफ होती थी. पर्दे पर उनकी मौजूदगी ही गाने को खास बना देती थी. इसी दौर में एक फिल्म में उनकी जोड़ी एक ऐसे अभिनेता के साथ बनी थी, जो इंडस्ट्री में नया था. दोनों के बीच फिल्माए गए इस रोमांटिक गाने में प्यार के साथ आने वाले कल के सपने भी थे. अलका याग्निक और उदित नारायण की आवाज, नदीम-श्रवण का संगीत और माधुरी-संजय की जोड़ी ने इसे खूबसूरत बना दिया था. गाना था 'किसी दिन बनूंगी मैं राजा की रानी'. गाने का मुखड़ा ही उस मासूम रोमांस को सामने रख देता है, जहां प्यार करने वालेअपने साथी से उसी खूबसूरत कल्पना को दोहराने के लिए कहते हैं. “... जरा फिर से कहना.”
1995 में आई इंद्र कुमार की फिल्म 'राजा' में माधुरी दीक्षित के साथ संजय कपूर नजर आए थे. संजय के लिए यह करियर की शुरुआत का दौर था, जबकि माधुरी तब बड़ी स्टार बन चुकी थीं. दोनों की जोड़ी को फिल्म में रोमांटिक अंदाज में पेश किया गया और इसके संगीत ने भी फिल्म की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.
अलका और उदित की आवाज में सजा था प्यार
'किसी दिन बनूंगी मैं राजा की रानी' को अलका याग्निक और उदित नारायण ने गाया था. इसके बोल समीर ने लिखे थे और संगीत नदीम-श्रवण का था. गाने की खासियत यह है कि इसमें प्यार को किसी भारी-भरकम अंदाज में पेश नहीं किया गया. दोनों किरदार एक-दूसरे की तारीफ करते हैं, नजरों और धड़कनों की बात करते हैं और अपने रिश्ते को लेकर एक खूबसूरत सपना देखते हैं. यही सादगी इसे 90s के रोमांटिक गानों का खास रंग देती है
माधुरी का वो दौर, जब उनके गाने भी बनते थे खास
माधुरी दीक्षित उस समय हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में थीं. उनके डांस और स्क्रीन प्रेजेंस का असर उनके गानों पर भी साफ दिखाई देता था. 'राजा' में भी यह बात देखने को मिली. फिल्म में सिर्फ यही गाना नहीं था. 'अखियां मिलाऊं कभी अखियां चुराऊं' भी काफी पसंद किया गया. वहीं माधुरी और संजय पर फिल्माया गया 'नजरें मिलीं दिल धड़का' भी फिल्म के रोमांटिक माहौल को आगे बढ़ाता था. इन गानों में 90s के संगीत की वह खासियत नजर आती है, जहां मेलोडी, रोमांस और आसान-सी भाषा मिलकर गीत को यादगार बना देती थी.
फिल्म चली, गाने याद रह गए
'राजा' संजय कपूर के करियर की शुरुआती सफल फिल्मों में शामिल हुई. हालांकि आगे चलकर वह अपने बड़े भाई अनिल कपूर जैसी लगातार बड़ी स्टारडम हासिल नहीं कर सके. लेकिन इस फिल्म ने उन्हें उस दौर के बड़े सितारों में से एक माधुरी के साथ पर्दे पर जरूर ला खड़ा किया. और इस जोड़ी से जुड़े गानों की अपनी अलग पहचान बनी. खासकर 'किसी दिन बनूंगी मैं राजा की रानी' में माधुरी की खूबसूरती, संजय कपूर का रोमांटिक अंदाज और अलका-उदित की आवाज मिलकर 90s के उस दौर की याद दिलाते हैं, जब फिल्मों में प्यार का इजहार कुछ ज्यादा ही मासूम और फिल्मी हुआ करता था.