2025 में दुनिया का नंबर-1 शिप रिसाइक्लिंग राष्ट्र बना भारत, वैश्विक हिस्सेदारी 35.4% पहुंची

Posted on: 2026-08-11


भारत वर्ष 2025 में जहाज रिसाइक्लिंग (Ship Recycling) के क्षेत्र में दुनिया में पहले स्थान पर रहा। एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, वैश्विक जहाज रिसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई है।

भारत में जहाज रिसाइक्लिंग की मात्रा भी 2024 के 1.86 मिलियन ग्रॉस टन (GT) से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन GT हो गई। यह लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि है।

फैक्टशीट के अनुसार, गुजरात का अलंग-सोसिया शिप रिसाइक्लिंग क्लस्टर भारत की जहाज रिसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा जहाज रिसाइक्लिंग केंद्र माना जाता है और भारत की कुल जहाज रिसाइक्लिंग गतिविधियों में इसकी हिस्सेदारी करीब 98 प्रतिशत है।

अलंग-सोसिया क्लस्टर की वार्षिक रिसाइक्लिंग क्षमता करीब 60 लाख GT है। यहां प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किए बिना हर साल लगभग 3.50 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) स्टील का उत्पादन किया जाता है।

इस क्षेत्र में अधिकृत जहाज रिसाइक्लिंग यार्ड, स्टील की डाउनस्ट्रीम री-रोलिंग मिलें और कचरा प्रबंधन से जुड़ा बुनियादी ढांचा मौजूद है। पिछले कुछ वर्षों में अलंग-सोसिया क्लस्टर का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है, जिससे यह वैश्विक जहाज रिसाइक्लिंग बाजार में भारत का प्रमुख केंद्र बन गया है।

भारत अब अपनी जहाज रिसाइक्लिंग क्षमता को लगभग दोगुना करके करीब 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (LDT) करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए अलंग शिप रिसाइक्लिंग यार्ड के नियोजित विकास के जरिए क्षमता का विस्तार किया जाएगा।

अलंग-सोसिया शिप रिसाइक्लिंग यार्ड स्थित सेफ्टी ट्रेनिंग एंड लेबर वेलफेयर इंस्टीट्यूट अब तक कुल मिलाकर 1.5 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रशिक्षण दे चुका है। प्रशिक्षण में व्यावसायिक सुरक्षा, खतरनाक सामग्रियों से निपटने और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे विषय शामिल हैं।

भारत में गुजरात के अलावा अमर आयरन उद्योग, कोलकाता और स्टील इंडस्ट्रियल्स केरल लिमिटेड (SILK), केरल में भी जहाज रिसाइक्लिंग यार्ड मौजूद हैं।

आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत की जहाज रिसाइक्लिंग क्षमता में यह वृद्धि वैश्विक बाजार में भारतीय यार्डों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाती है।

सरकार ने कहा कि Maritime India Vision (MIV) 2030 के तहत दुनिया का अग्रणी जहाज रिसाइक्लिंग राष्ट्र बनने का लक्ष्य भारत ने निर्धारित समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है।