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रांची, 10 अगस्त। जेपीएससी-जेएसएससी समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ छात्रों का सत्याग्रह आंदोलन सोमवार को 17वें दिन और भूख हड़ताल नौवें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो जयपाल सिंह स्टेडियम से एंबुलेंस के जरिए सीधे विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने पहुंचे।
एंबुलेंस से उतरते ही उत्साहित छात्र अभ्यर्थियों और समर्थकों ने देवेंद्र नाथ महतो को कंधे पर उठा लिया और उन्हें मार्च में आगे लेकर बढ़े। इस दौरान छात्रों में खासा उत्साह नजर आया।
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों को पूरी तरह लागू नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा घेराव में झारखंड के अलावा राज्य के बाहर रहने वाले लोग भी शामिल होने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन छात्रों के संघर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जाएगा।
महतो ने आरोप लगाया कि छात्र पिछले 17 दिनों से धैर्य के साथ जयपाल सिंह स्टेडियम में सत्याग्रह कर रहे हैं और सरकार से उनकी मांगों पर विचार करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए।
महतो ने कहा कि युवा ऊर्जा से भरे होते हैं, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन के दौरान छात्र अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ अश्लील या आपत्तिजनक नारे नहीं लगाए। इसके बावजूद छात्रों के प्रति सरकार का रवैया ऐसा है, जैसे वे उसके दुश्मन हों। उन्होंने इसे गलत करार दिया।
विधानसभा के आसपास की गई बैरिकेडिंग और लगाए गए नुकीले कंटीले तारों पर भी देवेंद्र नाथ महतो ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा के आसपास और वहां तक आने वाली सड़कों पर जिस तरह की सुरक्षा व्यवस्था की गई है, उससे ऐसा लग रहा है जैसे सीमा क्षेत्र बना दिया गया हो।
उन्होंने कहा कि नुकीले तार, बैरिकेडिंग या किसी अन्य तरह की रुकावट छात्रों को उनकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। महतो ने दावा किया कि विधानसभा घेराव के इस दिन और सरकार की कथित कार्रवाई को पूरा देश देख रहा है।
उन्होंने दोहराया कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक उनका सत्याग्रह और आंदोलन जारी रहेगा।