‘जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ आउट ऑफ सिलेबस’, IIT दिल्ली के छात्रों से बोले पीएम मोदी

Posted on: 2026-08-08


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में वही व्यक्ति सफल होगा, जो लगातार सीखता रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले 30-35 वर्षों में युवा जो कुछ करेंगे, वह विकसित भारत की यात्रा को प्रभावित करेगा। इसलिए युवाओं के हर निर्णय का आधार यह भी होना चाहिए कि उससे देश को क्या लाभ होगा और देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी।

दीक्षांत का पल जीवन में हमेशा याद रहेगा

प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के प्रतिभाशाली युवाओं के जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। यह जीवन का एक यादगार पल है और IIT दिल्ली परिसर में उनके साथ इस अनुभव को साझा करना उनके लिए भी खास है। उन्होंने कहा कि पिछली बार वह दीक्षांत समारोह में कोविड के दौर में वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे, लेकिन इस बार छात्रों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अच्छा लग रहा है।

छात्रों की उपलब्धियों पर जताया गर्व

पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह छात्रों के परिवार के लोग उन पर गर्व महसूस कर रहे हैं, उसी तरह उन्हें भी सभी छात्रों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल डिग्री लेकर नहीं जा रहे, बल्कि देश के लिए बहुत कुछ करने के सपने के साथ यहां से निकल रहे हैं। उन्होंने मेडल हासिल करने वाले छात्रों को भी बधाई दी और कहा कि IIT दिल्ली में AI से जुड़े नए प्रयासों की शुरुआत भी हुई है।

कैंपस की यादों को साथ ले जाने की सलाह

प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि IIT दिल्ली में बिताए दिनों की यादें भविष्य में उन्हें ऊर्जा देंगी। उन्होंने हॉस्टल, इंटर-हॉस्टल प्रतियोगिताओं, दोस्तों के साथ बिताए पलों और कैंपस की पुरानी नोक-झोंक का उल्लेख करते हुए कहा कि विदा होने से पहले इन यादों को एक बार फिर जरूर याद करें।

जिया सराय के पोहे और सतपुरा मेस के पराठों का किया जिक्र

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों के कैंपस जीवन से जुड़े अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि भावुक पलों के बीच कुछ छात्रों को जिया सराय का पोहा और सतपुरा मेस के पराठे भी याद आ रहे होंगे। उन्होंने कहा कि कई छात्र विंड टी पर कुछ और समय बिताना चाहते होंगे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि विंड टी पर जाएं तो उन्हें भी याद करें।

दोस्त, शिक्षक और सपोर्ट स्टाफ को नहीं भूलने की अपील

प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि कैंपस के दोस्त, शिक्षक, मेंटर्स और सपोर्ट स्टाफ उनके परिवार का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के बाद छात्र इन सभी को याद करेंगे और इनके प्रति आभारी रहेंगे। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि IIT से निकलते समय इन रिश्तों को एक संपत्ति के तौर पर अपने साथ लेकर जाएं और इन्हें कभी टूटने न दें।

तेजी से बदल रही दुनिया, टेक्नोलॉजी बनी सबसे बड़ी ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि छात्र ऐसे समय में संस्थान से निकल रहे हैं, जब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। रणनीतिक समीकरण और वैश्विक शक्ति संतुलन भी तेजी से बदल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत टेक्नोलॉजी की गति है। उन्होंने कहा कि कोई भी निश्चित रूप से नहीं बता सकता कि अगले 20-30 वर्षों की दुनिया कैसी होगी।

जो सीखेगा, वही जीतेगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलाव के दौर में चुनौतियों के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं। दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन बदलेंगे, लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए- जो सीखेगा, वही जीतेगा। उन्होंने कहा कि जो नए चैलेंज के नए समाधान खोजने का साहस रखता है, उसके लिए चुनौतियां अवसर में बदल जाती हैं।

डिग्री कठिन समस्याओं का समाधान करने की क्षमता का प्रमाण

पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि उनकी डिग्री केवल परीक्षा पास करने, अच्छा CGPA हासिल करने या अच्छा प्लेसमेंट पाने का प्रमाण नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि वे कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं। उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली तक पहुंचना आसान नहीं था और छात्रों ने एक-एक विषय, प्रोजेक्ट, मिड-सेम और एंड-सेम जैसी छोटी-छोटी चुनौतियों को पार करके यह मुकाम हासिल किया है।

बड़ी चुनौती को छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान खोजें

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब जीवन में कोई चुनौती बहुत बड़ी लगे तो उससे घबराने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देना चाहिए। उन्होंने IIT की लैब और सिमुलेशन के अनुभवों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार समाधान खोजने में घंटे या दिन लगते हैं, लेकिन अंत में समस्या का समाधान निकलता है और कुछ नया भी सामने आता है। उन्होंने कहा कि मुश्किलें अकेली नहीं आतीं, वे अपने साथ अवसर भी लेकर आती हैं।

जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ आउट ऑफ सिलेबस

पीएम मोदी ने कहा कि कैंपस में परीक्षा का सिलेबस तय होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। जीवन में न कोई तय कोर्स होता है और न कोई प्रश्नपत्र। कई बार यह भी कोई नहीं बताता कि असली सवाल क्या है और उसे खुद पहचानना पड़ता है।

सवाल पहचानने और समाधान खोजने की आदत डालें

प्रधानमंत्री ने कहा कि IIT के कई पूर्व छात्रों की सफलता का कारण केवल सही जवाब देना नहीं था, बल्कि उन सवालों को पहचानना था जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था। उन्होंने युवाओं से अपनी जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने तथा बिना सोचे-समझे स्वीकार की जाने वाली बातों को परखने और उन पर सवाल उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सवाल पूछना पर्याप्त नहीं है, समाधान खोजने का साहस भी होना चाहिए।

हर पीढ़ी का अपना राष्ट्रीय दायित्व

पीएम मोदी ने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अपने समय की चुनौतियां होती हैं और उसका अपना राष्ट्रीय दायित्व भी होता है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि गुलामी के दौर में उस पीढ़ी के सामने भारत की आजादी का लक्ष्य था। आज देश स्वतंत्र है और वर्तमान पीढ़ी के सामने विकसित भारत के निर्माण की जिम्मेदारी है।

अगले 30-35 साल विकसित भारत के लिए अहम

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के जीवन के अगले 30-35 वर्षों में वे जो कुछ करेंगे, वह विकसित भारत की यात्रा को प्रभावित करेगा। इसलिए उनके हर निर्णय का आधार यह भी होना चाहिए कि उससे देश को क्या फायदा होगा और देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता समेत कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

युवाओं के लिए नए सेक्टर खोले गए

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में युवाओं की भूमिका बहुत बड़ी है। देश का युवा जितना सशक्त होगा, देश उतना ही सशक्त होगा। इसी सोच के साथ कई ऐसे सेक्टर युवाओं के लिए खोले गए हैं, जिनमें पहले प्रवेश लगभग बंद था। सरकार की आधुनिक नीतियों के कारण युवाओं के लिए नए-नए क्षेत्रों में अवसर पैदा हो रहे हैं।

स्पेस सेक्टर में युवाओं के लिए खुला अवसरों का आकाश

प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले इस क्षेत्र में लगभग पूरा काम सरकार करती थी, लेकिन अब यही सेक्टर हजारों युवाओं के लिए नए अवसरों का आकाश बन गया है। युवा अपने लॉन्च व्हीकल बना रहे हैं, रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं और ऐसी उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, जो दुनिया के गिने-चुने देश ही हासिल कर पाए हैं।

सेमीकंडक्टर से चिप निर्माण तक आत्मनिर्भरता

पीएम मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी भारत ने तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जब भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाया था, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाए थे कि भारत ऐसा नहीं कर पाएगा। लेकिन अब पहली सेमीकंडक्टर यूनिट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर शिप तक सब कुछ भारत में युवाओं के हाथों से बनेगा।

ड्रोन सेक्टर में युवाओं के लिए नए अवसर

प्रधानमंत्री ने ड्रोन सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज युवा इस क्षेत्र में नई संभावनाएं तैयार कर रहे हैं। ड्रोन का इस्तेमाल खेती, दवाइयां पहुंचाने और देश की रक्षा एवं सुरक्षा में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में युवाओं के लिए और बड़े अवसर पैदा होंगे।

स्टार्टअप क्रांति को युवाओं ने दी ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की स्टार्टअप क्रांति को IIT जैसे संस्थानों से निकले युवाओं ने ताकत दी है। उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली से भी कई फाउंडर्स निकले हैं। एक संस्थान से इतनी बड़ी ताकत सामने आ सकती है तो पूरे देश में तैयार हो रही प्रतिभा की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने यूनिकॉर्न, डिजिटल पेमेंट और फिनटेक क्रांति का भी उल्लेख किया।

AI से क्वांटम कंप्यूटिंग तक युवाओं का इंतजार

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कई नए क्षेत्रों में अपनी नई यात्रा शुरू कर रहा है और देश को युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्रिटिकल मिनरल्स, डीप सी एक्सप्लोरेशन, बैटरी, पावर स्टोरेज, एनर्जी सिक्योरिटी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।

रिसर्च में युवाओं के लिए बड़ा अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि देश को नई रिसर्च की बहुत जरूरत है और सरकार का रिसर्च पर विशेष फोकस है। प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को शोध का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आइडियाज को आगे बढ़ाने के लिए रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम शुरू की गई है और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना भी हुई है।

रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपए तक की फंडिंग

प्रधानमंत्री ने कहा कि रिसर्च सेक्टर में एक लाख करोड़ रुपए तक की फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने छात्रों से कहा कि देश को उनसे रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी अपेक्षाएं हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि देश को उन पर भरोसा भी है।

दुनिया की रिसर्च जर्नल्स तक आसान पहुंच

पीएम मोदी ने कहा कि अकादमिक संसाधनों तक पहुंच को भी आसान बनाया गया है। ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ के माध्यम से दुनिया की प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल्स देश के छोटे से छोटे शहर तक बिना किसी अतिरिक्त लागत के पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि रिसर्च के क्षेत्र में अभी लंबी दूरी तय करनी है और यह काम युवाओं की प्रतिबद्धता से ही पूरा हो सकता है।

दूसरे से तुलना को बताया बड़ा डिस्ट्रैक्शन

प्रधानमंत्री ने छात्रों को करियर में एक-दूसरे से तुलना करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसे कितना पैकेज मिला, कौन किस कंपनी में गया, किस शहर या देश में गया और किसने स्टार्टअप शुरू किया, सोशल मीडिया के दौर में ऐसी तुलना कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है और व्यक्ति की असली दौड़ किसी दूसरे से नहीं, बल्कि खुद से है।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान

पीएम मोदी ने छात्रों से हर दिन खुद को कल से बेहतर बनाने की कोशिश करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने छात्रों, उनके माता-पिता, परिवारजनों, शिक्षकों और पूरी यात्रा में साथ खड़े रहे सभी लोगों को बधाई दी।

छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सभी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और उनके लगातार नई ऊंचाइयों को छूने की कामना करते हैं। उन्होंने छात्रों को उनके नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं और धन्यवाद के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।