चीन और आसियान देशाें ने अमेरिका व ईरान से की संघर्ष रोकने की मांग

Posted on: 2026-07-24


मनीला, 24 जुलाई । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच चीन और 11 सदस्यों वाले दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के विदेश मंत्रियों ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को तुरंत समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, बातचीत का रास्ता अपनाने और युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने का आग्रह किया।

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार, शुक्रवार को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित चीन और आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि मध्य पूर्व की तेजी से बिगड़ती स्थिति से आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान लगातार 13वें दिन भी एक-दूसरे पर जवाबी सैन्य हमले कर रहे हैं। जबकि पिछले महीने ही उन्होंने 8 अप्रैल को हुए सीज़फायर को बनाए रखने और युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बातचीत करने के मकसद से 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग' पर साइन किया था।

बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया गया। विदेश मंत्रियों ने कहा कि सभी पक्ष बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखें और शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद जारी रखें।

चीन और आसियान ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने अमेरिका और ईरान से अपील की कि वे "सीज़फायर की शर्तों का सख्ती से पालन करते हुए इसे पूरी तरह और असरदार ढंग से लागू करना सुनिश्चित करें।"

संयुक्त बयान में संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच बनाए रखने की भी अपील की गई। साथ ही, सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने तथा तनाव बढ़ाने वाली किसी भी कार्रवाई से बचने का आग्रह किया गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के मद्देनजर चीन और आसियान ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (यूएनसीएलओएस) के तहत अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले जलमार्गों में जहाजों की सुरक्षित, निर्बाध और निरंतर आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।