हाईकोर्ट ने NDPS केस में 7 आरोपियों को किया बरी, पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल

Posted on: 2026-07-22


 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सात आरोपियों को सुनाई गई 10 से 15 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा को रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पुलिस जांच में गंभीर प्रक्रियागत खामियां पाते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया और तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया। साथ ही कोर्ट ने मामले की जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश भी दिए हैं।

2022 में दर्ज हुआ था मामला
मामला 10 अक्टूबर 2022 का है, जब रायपुर के आजाद चौक थाना पुलिस को नशीली गोलियों की अवैध बिक्री की सूचना मिली थी। पुलिस ने सबसे पहले नियाजुद्दीन उर्फ विक्की और जे. भास्कर राव को गिरफ्तार किया। इनके मेमोरेंडम के आधार पर रविंद्र गोयल, मुकेश कुमार साहू, मोहम्मद हसन, साहिल हसन, आकाश विश्वकर्मा और विरल पटेल को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों के पास से भारी मात्रा में ट्रामाडॉल और अल्प्राजोलम की गोलियां एवं कैप्सूल बरामद हुए थे।

स्पेशल कोर्ट ने सुनाई थी सजा
एनडीपीएस स्पेशल कोर्ट, रायपुर ने 1 सितंबर 2025 को सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10 से 15 साल के कठोर कारावास और एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने जांच में पाईं गंभीर खामियां
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पुलिस जांच में कई गंभीर त्रुटियां पाईं।

कोर्ट ने पाया कि धारा 42(2) के तहत तैयार पंचनामा के समय और उसकी प्राप्ति के रिकॉर्ड में विरोधाभास था। जांच अधिकारी के अनुसार पंचनामा शाम 4 बजे तैयार हुआ, जबकि सीएसपी कार्यालय में उसकी प्राप्ति दोपहर 3:25 बजे दर्ज थी।