‘रेल भूमि’ पोर्टल से 30-40 प्रतिशत तेज होगा भूमि अधिग्रहण, रेलवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

Posted on: 2026-07-14


नई दिल्ली, 14 जुलाई । भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ‘रेल भूमि’ पोर्टल शुरू करने की घोषणा की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के लागू होने से राज्यों के आधार पर भूमि अधिग्रहण की समय-सीमा में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है, जिससे रेल परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।

वैष्णव ने यहां रेलवे सुधारों पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अभी तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी हद तक कागजी कार्यवाही पर आधारित रही है, जिसके कारण कई परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब होता था। रेल भूमि पोर्टल इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर भूमि अधिग्रहण के प्रत्येक चरण की ऑनलाइन निगरानी करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे में व्यापक संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं और रेल भूमि पोर्टल उन प्रमुख पहलों में शामिल है, जो भारतीय रेलवे की परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने और देश में तेज गति से आधारभूत ढांचे के विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैष्णव ने बताया कि रेलवे ने भूमि हस्तांतरण के लिए स्पष्ट एवं चरणबद्ध व्यवस्था लागू की है, जिससे विवादों की संभावना कम होगी और परियोजनाओं का काम समय पर शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ‘रेल भूमि’ पोर्टल को सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) ने विकसित किया है। यह वेब-आधारित प्लेटफॉर्म आईआरपीएसएम, आईपीएएस और एचआरएमएस सहित रेलवे की विभिन्न डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत करेगा। इसके माध्यम से भूमि अधिग्रहण के प्रमुख चरणों का ऑनलाइन निष्पादन, विभागों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, कार्यप्रवाह का प्रभावी प्रबंधन तथा डैशबोर्ड और एमआईएस के जरिए रीयल-टाइम निगरानी संभव होगी। अनुमान है कि इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 30 से 40 प्रतिशत तक तेज होगी, परियोजनाओं की बेहतर योजना बन सकेगी और रेलवे अवसंरचना कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण किसी भी रेल परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण और समय लेने वाला चरण होता है। नई डिजिटल व्यवस्था से नई रेल लाइन, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, माल गलियारे और हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

रेल मंत्रालय का यह कदम ऐसे समय आया है जब कई बड़ी आधारभूत ढांचा परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण प्रभावित होती रही हैं। मंत्रालय का मानना है कि डिजिटल निगरानी, ऑनलाइन कार्यप्रवाह और समयबद्ध ट्रैकिंग से राज्यों और जिला प्रशासन के साथ समन्वय अधिक प्रभावी होगा तथा लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव हो सकेगा। हालांकि, भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया संबंधित राज्य सरकारों और सक्षम प्राधिकारियों के माध्यम से ही पूरी होगी।