बिलासपुर । छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) में बदहाल व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि शपथ पत्र के कई हिस्सों में एक जैसी बातें दोहराई गई हैं, जिससे प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि दस्तावेज भले ही व्यवस्थित और आकर्षक दिखता हो, लेकिन इससे अस्पताल की जमीनी हकीकत नहीं बदल जाती। उन्होंने कहा कि यदि CIMS की व्यवस्थाएं संतोषजनक होतीं तो मामला हाईकोर्ट तक नहीं पहुंचता। सरकार और विभाग को वास्तविक स्थिति कोर्ट के सामने रखनी चाहिए, न कि उसे गुमराह करने का प्रयास करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नरों की निरीक्षण रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें अस्पताल में पानी रिसाव, बारिश के दौरान कई हिस्सों में जलभराव और लंबे समय से बंद पड़े फायर फाइटिंग सिस्टम जैसी गंभीर खामियां उजागर हुईं। शासन ने अदालत को बताया कि 15 जून 2026 को फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के आदेश जारी कर दिए गए हैं और कार्य तेजी से जारी है।