नई दिल्ली, 19 मई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को संस्कृत के एक सुभाषित पाठ में कहा कि धरती माता समस्त मानवता को एक परिवार मानती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कहा, "धरती माता संपूर्ण मानवता के लिए एक कुल की शिक्षिका हैं। उनके लिए यह पूरा संसार एक घर की तरह है, जहां हर संस्कृति का अपना महत्व और सम्मान है।”
उन्होंने “जनं बिभ्रति बहुधा विवाचसं नानाधर्मान् पृथिवी यथौकसम्। सहस्रं धारा द्रविणस्य मे दुहं ध्रुवेव धेनुरानपस्फुरन्ति ॥" का अर्थ बताते हुए कहा कि धरती माता विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले और विभिन्न धर्मों और परंपराओं का पालन करने वाले लोगों को एक ही परिवार के सदस्य के रूप में अपनाती है। ईश्वर करे कि यह धरती हमारे लिए समृद्धि की हजारों धाराएं बहाए, ठीक उसी प्रकार जैसे एक शांत और प्रेममयी गाय दूध देती है।