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केन्द्र सरकार ने दुर्लभ रोगों के प्रबंधन में नवाचार, शीघ्र निदान और मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। नई दिल्ली में आयोजित आज दो दिवसीय राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक और निरंतर प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हितधारकों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना और देश में दुर्लभ रोगों के प्रबंधन को मजबूत करने के लिए नए विचार सृजित करना है।
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि दुर्लभ रोगों के समाधान की आवश्यकता को सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में रेखांकित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह नीति उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है, जो देश भर के प्रमुख तृतीयक अस्पताल हैं। ऐसे उत्कृष्टता केंद्रों की संख्या वर्षों में आठ से बढ़कर 15 हो गई है, जिनमें उत्तर-पूर्वी भारत के दो केंद्र शामिल हैं। श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि नीति के तहत वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे दुर्लभ रोगों से पीड़ित रोगियों के उपचार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी।