भिलाई । संभाग स्तरीय गोंड समाज के पंजीयन का विवाद सुलझ गया है। लगभग 33 वर्ष पुरानी संस्था का पंजीयन क्रमांक 1439 है जो 1993 से पंजीकृत है। समाज के पंजीयन को कुछ लोगों
द्वारा फर्जी दस्तावेजों की मदद से हथिया लिया गया। इसके बाद समाज के लोगों ने
पंजीयन को यथावत रखने भरपूर प्रयास किया। इसके बाद समाज के लोगों ने अधिवक्ता
प्रभांक ठाकुर के जरिए पंजीयक फर्म एवं संस्थाए रायपुर के समक्ष अपील प्रस्तुत की।
लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार संभाग स्तरीय गोंड समाज के वास्तविक लोगों को उनका
पंजीयन वापस मिला। शुक्रवार को समाज के लोगों ने प्रेसवार्ता के माध्यम से इसकी
जानकारी साझा की और अधिवक्ता प्रभांक ठाकुर का आभार जताया।
इस पूरे मामले में समाज के अध्यक्ष मोहन सिंह हिडको ने बताया कि
समाज के तत्कालीन पदाधिकारियों के द्वारा वर्ष 1998 से 2011 तक की जानकारी सहायक पंजीयक दुर्ग को प्रस्तुत की। 2024 में समाज के प्रेम सिंह धावडे एवं अन्य
लोगों ने असत्य जानकारी देकर नागवंशी गोंड समाज का अध्यक्ष बताते हुए सहायक पंजीयक
से सूची अनुमोदित करा ली। अधिवक्ता प्रभांक ठाकुर ने पंजीयक को बताया की संविधान
की सूची में गोंड जाती दर्ज है ना की नागवंशी गोंड, इससे समाज में भ्रम उतपन्न हो जायेगा तथा जाती
प्रमाण पत्र में भिन्नता होने से समाज के लोगों को लाभ मिलने में कठनाई का सामना
करना पड़ेगा।
इसके विपरीत दूसरे
पक्ष के लोगों ने बताया वे नाग की पूजा करते है इस लिए नागवंशी लिखते है और वर्ष 1983-84 से संस्था चला रहे है। इन लोगों ने दावा
किया मृत प्राय संस्था को जीवित कर समाज हित में कार्य कर रहे है इसलिए अध्यक्ष
नरेन्द्र सिंह नेताम, कुमार कोरेटी सुरेश दुग्गा, जगत राम सलामे एवं तुलसी राम मरकाम, मोहन सिंग हिडको आदि को संस्था चलाने का
अधिकार नहीं है इसलिए अनुमोदित सूची विधि संमंत है। अधिवक्ता प्रभांक ठाकुर ने
तर्क दिया की यह लोग 1983-84 से संस्था चलाने का दावा कर रहे हैं जबकि संभाग स्तरीय गोंड
समाज पंजीयन क्रमांक का पंजीयन वर्ष 1993 में हुआ है जिससे स्पष्ट है कि दूसरे पक्ष के लोग अलग हैं समाज
को भटकाने के लिए संभाग स्तरीय गोंड समाज के नाम का उपयोग कर रहे है जिससे सामजिक
व्यव्स्था में विसंगति आयेगी।
अधिवक्ता प्रभांक
ठाकुर के तर्क से सहमती जताते हुए पंजीयक फर्म एवं संस्था ने अपने अपील आदेश 24 सितंबर 2025 में सहायक पंजीयक प्रमोद कुजूर द्वारा 28 अक्टूबर 20 24 की प्रेम सिंह धावडे के अध्यक्ष वाली जारी सूची
को निरस्त कर दिया। इसके बाद प्रेम सिंह धावडे ने छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं
उद्योग विभाग के उप सचिव के समक्ष चुनोती दी जिस पर पुनः अधिवक्ता प्रभांक ठाकुर
ने सचिव को बताया की संभाग स्तरीय गोंड समाज जिसमे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र तक के सदस्य है
जबकि उत्तरवादी स्वयं को नागवंशी गोंड समाज का अध्यक्ष बताया गया है जो की पंजीकृत
नहीं है फिर भी सहायक पंजीयक ने दस्तावेजो का अवलोकन किये बिना उनके द्वारा
प्रस्तुत सूची को संभाग स्तरीय गोंड समाज पंजीयन क्रमांक 1439 के नाम से अनुमोदित कर दिया।
उप सचिव ने सुनवाई
के दौरान रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाए रायपुर द्वारा दिए आदेश को यथावत रखते हुए
संभाग स्तरीय गोंड समाज के पक्ष में निर्णय दिया। समाज के अध्यक्ष मोहन सिंह हिडको
ने समाज को बताया की संभाग स्तरीय गोंड समाज सभी वर्गों के संघर्ष के लिए कार्य
करता रहेगा तथा गोंड समाज के सभी वर्गों के लिए सदयस्ता अभियान चला कर समाज का
विस्तार किया जाएगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में अपना पक्ष मजबूती से रखने वाले
अधिवक्ता प्रभांक ठाकुर समाज के सभी वर्गों की ओर से आभार जताया।