आईएनएस निरीक्षक कोलंबो पहुंचा, इन-एसएलएन डाइवेक्स 2026 में लेगा हिस्सा

Posted on: 2026-04-22


भारतीय नौसेना का गोताखोरी सहायता और पनडुब्बी बचाव पोत आईएनएस निरीक्षक 21 अप्रैल 2026 को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचा। यह जहाज 21-27 अप्रैल 2026 तक आयोजित द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास ‘इन-एसएलएन डाइवेक्स 2026’ के चौथे संस्करण में भाग लेगा।

संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य और गतिविधियां

यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, सामंजस्य और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान दोनों पक्षों की गोताखोर टीमें विशेष अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेंगी।

समुद्री संबंधों को मजबूत करने की पहल

एक सप्ताह तक चलने वाला यह अभ्यास भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दोनों देशों के साझा समुद्री हितों और सहयोग की निरंतरता को भी दर्शाता है।

औपचारिक स्वागत और उच्चस्तरीय मुलाकातें

श्रीलंका नौसेना ने नौसेना बैंड की उपस्थिति में जहाज का औपचारिक स्वागत किया। आईएनएस निरीक्षक के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर शैलेश त्यागी ने पश्चिमी नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल एसजे कुमारा से मुलाकात कर आपसी हितों पर चर्चा की।

सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण कार्यक्रम भी शामिल

इस दौरे के दौरान पेशेवर बैठकों के अलावा सामाजिक मेलजोल, खेल प्रतियोगिताएं और संयुक्त योग सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच मित्रता और सौहार्द को और मजबूती मिलेगी।

‘आरोग्य मैत्री’ पहल के तहत सहायता

भारत की मानवीय सहायता पहल के तहत यह जहाज ‘आरोग्य मैत्री’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीलंका को दो ‘मैत्री भीष्म क्यूब’ भेंट करेगा। ये अत्याधुनिक पोर्टेबल चिकित्सा इकाइयां हैं, जो 200 आपातकालीन मामलों को संभालने में सक्षम हैं और त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए डिजाइन की गई हैं।

रक्षा सहयोग को मिलेगा और बल

समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना श्रीलंकाई नौसेना को 9 मिमी गोला-बारूद के 50,000 राउंड भी सौंपेगी।

हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग की झलक

भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना के बीच यह गोताखोरी अभ्यास एक अहम द्विपक्षीय पहल है, जो दोनों देशों के बीच गहरे समुद्री सहयोग को दर्शाता है। यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और सामूहिक विकास को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।