नई दिल्ली: अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले
रिलायंस समूह ने गुरुवार को कहा कि अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना, जो पहले समूह में वरिष्ठ पदों पर थे, वर्तमान में समूह के साथ काम नहीं कर
रहे हैं। इन दोनों को प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड
(आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) जैसी समूह की संस्थाओं
से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले
में गिरफ्तार किया है।
रिलायंस ने बताया कि झुनझुनवाला ने दिसंबर 2019 में समूह छोड़
दिया था, जबकि बापना ने
सितंबर 2019 में समूह छोड़ा
था, और अब रिलायंस
इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड सहित समूह की किसी भी कंपनी से
उनका कोई संबंध नहीं है।
झुनझुनवाला ने समूह में अपने कार्यकाल के दौरान रिलायंस समूह
के समूह प्रबंध निदेशक, साथ ही
रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के उपाध्यक्ष और निदेशक के रूप में कार्य किया। वहीं, बापना ने रिलायंस समूह में अपने
कार्यकाल के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी और रिलायंस
होम फाइनेंस लिमिटेड के निदेशक के रूप में कार्य किया।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज की गई कई ईसीआईआर
के आधार पर पीएमएलए के तहत चल रही जांच में ईडी ने झुनझुनवाला और बापना को
गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक के तौर पर झुनझुनवाला पर
आरोप है कि वे संबंधित समय में आरएचएफएल और आरसीएफएल के विभिन्न कार्यों में
प्रमुख निर्णय लेने वालों में से एक थे।
इसी महीने की शुरुआत में, सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य
अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को गलत तरीके से 3,750 करोड़ रुपए का
नुकसान पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम लिमिटेड से प्राप्त शिकायत के
आधार पर साजिश, धोखाधड़ी, गबन और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के
तहत अपराधों के लिए दर्ज किया गया था।
आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और उसके प्रबंधन ने
एलआईटी द्वारा 4,500 करोड़
रुपए के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) सब्सक्राइब करते समय कंपनी की वित्तीय
स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी, जिससे सरकारी बीमा कंपनी को नुकसान हुआ। हालांकि, मामले की जांच जारी है।
सीबीआई ने इससे पहले आरकॉम लिमिटेड, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ कई बैंकों
को धोखा देने के आरोप में तीन मामले दर्ज किए थे। कथित 2,929.05 करोड़ रुपए के
एसबीआई धोखाधड़ी मामले के संबंध में अनिल अंबानी से सीबीआई ने दिल्ली स्थित अपने
मुख्यालय में लगातार दो दिनों तक पूछताछ की थी।
पिछले महीने के अंत में, सर्वोच्च न्यायालय ने अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस
(आरकॉम) और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी की
समन्वित, निष्पक्ष और
समयबद्ध जांच की आवश्यकता पर जोर दिया था।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता
वाली पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)
जैसी जांच एजेंसियों को सच्चाई को पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से उजागर करने के लिए
"मिलकर" समन्वय से काम करना चाहिए।