Aadhaar में छूट की मांग, बेसहारा लोगों के अधिकार का मुद्दा उठा

Posted on: 2026-04-12


पुणे में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर नई चर्चा सामने आई है, जहां मुंबई स्थित हार्मनी फाउंडेशन ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी जीवन ज्योति आश्रम की अपील का समर्थन किया है। इस अपील में यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया और सरकार से आग्रह किया गया है कि बीमार, बेसहारा और मानसिक रूप से कमजोर लोगों को आधार कार्ड बनाने में विशेष छूट दी जाए। जानकारी के अनुसार, आश्रम में रहने वाले कई लोग ऐसे हैं जिनके पास पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। इस कारण वे आधार कार्ड बनवाने में असमर्थ हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए आश्रम ने संबंधित अधिकारियों से नियमों में लचीलापन लाने की मांग की है।

हार्मनी फाउंडेशन के फाउंडर-चेयरमैन डॉ. अब्राहम मथाई ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को आधार कार्ड से वंचित रखना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को जीने का अधिकार प्राप्त है, और आधार जैसी पहचान से वंचित करना इस अधिकार को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की देखभाल आश्रमों में की जा रही है, उनमें कई ऐसे हैं जो शारीरिक या मानसिक रूप से इतने कमजोर हैं कि वे खुद से दस्तावेज जुटाने या प्रक्रिया पूरी करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उनके लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है, ताकि उन्हें पहचान और उससे जुड़े अधिकार मिल सकें।

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मौजूदा नियमों के तहत आधार कार्ड बनवाने के लिए पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। लेकिन आश्रमों में रहने वाले कई लोगों के पास ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते, जिससे वे इस प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस स्थिति में विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए। मिशनरीज ऑफ चैरिटी जीवन ज्योति आश्रम ने अपनी अपील में कहा है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां ऐसे लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करें। इसमें बायोमेट्रिक पहचान या आश्रम के प्रमाण पत्र के आधार पर आधार कार्ड जारी करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
पुणे और अन्य शहरों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि आधार कार्ड आज के समय में कई सेवाओं तक पहुंच का मुख्य माध्यम बन चुका है। इसके बिना स्वास्थ्य सेवाएं, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ लेना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ऐसे लोगों को इससे जोड़ना जरूरी है जो पहले से ही समाज के कमजोर वर्ग में आते हैं। इस मुद्दे ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है that अगर इन लोगों को पहचान से वंचित रखा जाता है, तो यह उनके अधिकारों और गरिमा पर असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।


हार्मनी फाउंडेशन ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया मिलकर एक विशेष नीति तैयार करें, जिससे आश्रमों और देखभाल केंद्रों में रहने वाले लोगों को आधार कार्ड जारी किया जा सके। इससे उन्हें मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, यह मामला उन लोगों के अधिकारों से जुड़ा है जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग में आते हैं। आधार कार्ड से जुड़ी इस मांग ने यह सवाल उठाया है कि क्या मौजूदा व्यवस्था में ऐसे लोगों के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं या नहीं। अब इस पर सरकार और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।