बिलासपुर । अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय, बिलासपुर में 9 फरवरी को 'रीजनल ग्रोथ मॉडल ऑफ इंडियन इकोनॉमी' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग द्वारा किया गया, जिसके संयोजक विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल दुबे रहे। उन्होंने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. अंग्रेज सिंह राणा ने भारतीय अर्थव्यवस्था के क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास योजनाओं, स्टार्टअप उद्योग एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम में सुधार के लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त है।
मुख्य वक्ता प्रो. यशवंत कुमार ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ को खनिज संपदा से समृद्ध एवं आदिवासी बहुल राज्य बताते हुए कहा कि राज्य का विकास अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015 में कंप्रिहेंसिव प्लानिंग मॉडल को राज्य विकास के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था और कैटालिस्ट बेस्ड मॉडल को लघु स्तर पर लागू करने की बात कही गई थी। प्रो. यशवंत कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील राज्यों के लिए कंप्रिहेंसिव मॉडल को ही अपनाना आवश्यक है तथा देश और विकासशील राज्यों के लिए अलग-अलग विकास रणनीतियां बनाई जानी चाहिए। उन्होंने फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल मैनपॉवर, टोपोलॉजी तथा नॉमिनल एवं पीपीपी आधारित वर्टिकल व हॉरिजॉन्टल ग्रोथ मॉडल के माध्यम से विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि रघुराज किशोर तिवारी ने भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए देश को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था आज विश्व के लिए एक उदाहरण बन चुकी है। राज्यों के विकास के संदर्भ में उन्होंने गोवा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था की भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए उनके सर्वांगीण विकास के लिए दूरदर्शी सोच अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी, कुलपति, अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय एवं इंडियन इकोनॉमी संगठन के प्रेसिडेंट ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि देश का संपूर्ण विकास उसकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है। उन्होंने सेंट्रलाइज्ड मॉडल की सीमाओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए डिसेंट्रलाइज्ड मॉडल को समग्र विकास के लिए अधिक प्रभावी बताया। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना को ध्यान में रखते हुए अलग विकास मॉडल की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की समृद्धि से ही देश की समृद्धि संभव है।
कार्यक्रम में डॉ. पूजा पाण्डेय (कार्यक्रम सचिव), डॉ. सुमोना भट्टाचार्य, डॉ. गौरव साहू, आदित्य प्रताप सिंह, डॉ. एच.एस. होता, डॉ. मनोज सिन्हा, डॉ. प्रमोद तिवारी, डॉ. महेन्द्र मेहता, खेमेन्द्र देवांगन, डॉ. हामिद अब्दुल्ला, डॉ. हैरी जॉर्ज, यशवंत पटेल, श्रीमती रेवा कुलश्रेष्ठ, डॉ. स्वाति रोज टोप्पो, डॉ. जीतेन्द्र कुमार, डॉ. रश्मि गुप्ता, उप कुलसचिव श्रीमती नेहा राठिया, डॉ. अनिल पटेल, राहुल हरिप्रिया सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।