भुजंगासन: फायदे, सही अभ्यास और ध्यान रखने योग्य बातें

Posted on: 2026-01-09


भुजंगासन एक ऐसा योगासन है जो कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। समय की कमी होने पर भी इस आसन को रोज़ाना अपनाकर आप अपनी सेहत में सुधार ला सकते हैं। हालांकि, इसका अभ्यास सही तरीके से करना जरूरी है, क्योंकि गलत मुद्रा से चोट या परेशानी भी हो सकती है।

भुजंगासन के प्रमुख लाभ:

·         पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है।

·         पाचन तंत्र, लीवर और किडनी की कार्यक्षमता को सुधारता है।

·         छाती, फेफड़े, कंधे और पेट की मांसपेशियों को फैलाकर शरीर को ताजगी देता है।

·         तनाव और मानसिक थकान को कम करता है।

·         साइटिका की समस्याओं में राहत प्रदान करता है।

·         अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक।

·         प्रजनन प्रणाली को सशक्त बनाता है और अनियमित मासिक धर्म में सुधार करता है।

·         रक्त संचार को बढ़ाकर चेहरे पर निखार लाता है।

भुजंगासन करने का सही तरीका:

1.      पेट के बल लेट जाएँ और पैरों को थोड़ा अलग रखें।

2.      हाथों को छाती के पास रखते हुए हथेलियों को फर्श पर टिकाएँ।

3.      गहरी सांस लें और धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएँ, सिर और छाती को आसमान की ओर देखें।

4.      इस मुद्रा में कुछ समय तक रहें और सांस को सामान्य बनाए रखें।

5.      धीरे-धीरे शरीर को वापस शुरुआती स्थिति में लाएँ।

6.      इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएँ।

अभ्यास के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

·         शरीर को ज़्यादा ज़ोर से न उठाएँ, हल्का और नियंत्रित आंदोलन करें।

·         पीठ में किसी भी प्रकार की चोट या दर्द होने पर अभ्यास न करें।

·         गर्भवती महिलाएं और गंभीर रीढ़ की समस्या वाले लोग केवल विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।