बिलासपुर, 25 मार्च। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामला दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब इसकी मेरिट पर विस्तृत सुनवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
करीब दो दशक पुराने रामावतार जग्गी हत्याकांड में नया घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में फिर से शुरू हो गई है। बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में इस प्रकरण पर प्रारंभिक सुनवाई हुई, जिसमें पक्षकार भी मौजूद रहे। कोर्ट ने मामले की विस्तृत और अंतिम सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो साल पूर्व दोषियों की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।
हालांकि, बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए मामले को पुनः हाईकोर्ट भेज दिया, ताकि पूरे प्रकरण की गहराई से दोबारा समीक्षा हो सके। इस हत्याकांड की शुरुआत 4 जून 2003 को हुई थी, जब एनसीपी से जुड़े नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच को लेकर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया था।
सीबीआई जांच में कई लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े नाम भी शामिल थे। कुल 31 आरोपियों में से कुछ सरकारी गवाह बन गए, जबकि अधिकांश को अदालत ने दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। मामले में एक प्रमुख आरोपी को निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ पीड़ित पक्ष ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसी अपील के आधार पर अब यह केस फिर से हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि यह मामला केवल प्रत्यक्ष साक्ष्यों का नहीं, बल्कि एक बड़े षड्यंत्र से जुड़ा है, जिसकी पूरी सच्चाई सामने लाना आवश्यक है। रामावतार जग्गी, जिनका व्यावसायिक पृष्ठभूमि मजबूत था, प्रदेश की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका रखते थे और बड़े नेताओं के करीबी माने जाते थे। उनकी हत्या उस समय हुई थी, जब राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव और चुनावी हलचल देखने को मिल रही थी।
अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि वर्षों पुराने इस चर्चित केस में आगे क्या कानूनी दिशा निकलती है।